सेहत
Why Fruit Juice is Harmful: छह माह से एक साल के बच्चों को फलों का रस बिलकुल नहीं देना चाहिए क्योंकि ये उनकी सेहत को फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकता है
डीएनए हिंदीः क्या आपको पता है कि बच्चों को फलों का रस देने के लिए क्यों मना किया जाता है. इसका मतलब ये नहीं कि बच्चों को फल ही नहीं खिलाना चाहिए. बच्चों को रस की जगह साबुत फल खिलाना चाहिए. वैसे, साबूत फल बच्चों को ही नहीं बड़े लोगों के लिए भी बेहद फायदेमंद होते हैं.
चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉक्टर चंद्रशेखर झा ने बच्चों को फलों के रस और साबुत फल दिए जानें पर कई ऐसी जानकारी दी है जिसे शायद ही आप जानते होंगे. अमूमन लोग बच्चों को फल न खाने पर उसका जूस दे देते हैं या बीमारी में फलों का जूस पिलाते रहते हैं. डॉक्टर चंद्रशेखर झा के मुताबिक एक साल से छोटे बच्चों को जूस देना उन्हें कई तरह की बीमारियों का शिकार बना सकता है.
डायरिया से लेकर आंत और दांतों के खराब होने तक की समस्या नन्हें शिशु को हो सकती है. तो चलिए जानें कि आखिर बच्चों को फलों का रस क्यों नहीं देना चाहिए और साबुत फल ही क्यों खिलाना चाहिए. बता दें कि अमेरिकन शिशु अकादमी भी एक साल से छोटे बच्चों को फ्रूट जूस देने से मना करता है और साबुत फल खिलाने कि सिफारिश करता है.
फल खिलाने के बच्चों को मिलते हैं ये फायदे भी
साबूत फल बच्चों को खिलाने में बच्चों को कई तरह की ट्रेनिंग भी मिल जाती है. वह अलग-अलग फलों के आकार, प्रकार और रंगों के बारे में जानकारी हासिल कर लेता है. इसके साथ ही अलग-अलग फलों को कैसे छीलना है, इस बारे में उसकी ट्रेनिंग हो जाती है.
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चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉक्टर चंद्रशेखर झा ने बताया कि बच्चों को फल देना अब जरूरी हो गया है क्योंकि उनकी न तो वह फिजिकल एक्टिविटी करते हैं न ही घरों से बाहर जाकर खेलते हैं. उनके खानपान में बहुत पोषक तत्व वाली चीजें भी नहीं रहती हैं, ऐसे में उन्हें साबुत फल और हरी सब्जियों से ही विटानिम, मिनरल्स और फाइबर आदि मिल सकता है और उनका विकास बेहतर हो सकता है.
Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें.)
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