सेहत
मोटापा कई गंभीर बीमारियों की जड़ है. यह शरीर में डायबिटीज, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, कुछ प्रकार के कैंसर और स्ट्रोक जैसे 5 प्रमुख रोगों के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है, जिसे नियंत्रित करना अत्यंत आवश्यक है.
आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, खराब खान-पान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण मोटापा एक वैश्विक महामारी का रूप ले चुका है. यह केवल सौंदर्य या शरीर के आकार तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की नींव रखता है. विशेषज्ञों का मानना है कि मोटापा स्वयं में कोई बीमारी नहीं है, लेकिन यह एक ऐसी स्थिति है जो शरीर में कई जानलेवा और दीर्घकालिक रोगों के लिए 'ट्रिगर' का काम करती है. मधुमेह से लेकर कैंसर तक, मोटापा सीधे तौर पर पांच ऐसी बड़ी बीमारियों से जुड़ा हुआ है जो न केवल जीवन की गुणवत्ता को कम करती हैं, बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकती हैं. शरीर में अतिरिक्त चर्बी का जमा होना इंसुलिन प्रतिरोध, सूजन और हार्मोनल असंतुलन पैदा करता है, जो इन बड़ी बीमारियों के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है.
मोटापा और टाइप-2 मधुमेह का रिश्ता अटूट माना जाता है. जब शरीर में अत्यधिक चर्बी जमा हो जाती है, तो इंसुलिन की प्रभावशीलता घटती जाती है, जिससे रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ जाता है. लंबे समय तक यह स्थिति चलने पर इंसुलिन प्रतिरोध विकसित हो जाता है, जो अंततः मधुमेह का रूप ले लेती है. मोटे व्यक्तियों में इंसुलिन बनाने वाली अग्न्याशय की कोशिकाएं भी थककर काम करना बंद कर देती हैं.
शरीर में अधिक वसा जमा होने से रक्त वाहिनियों पर दबाव बढ़ता है. धमनियां सख्त और संकरी हो जाती हैं, जिससे हृदय को रक्त पंप करने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है. यह निरंतर दबाव धीरे-धीरे उच्च रक्तचाप का कारण बनता है. मोटापा विशेषकर पेट के आसपास जमा चर्बी, हृदय और गुर्दे दोनों पर अतिरिक्त बोझ डालती है, जिससे स्ट्रोक और दिल के दौरे का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.
मोटापा केवल हृदय पर शारीरिक दबाव नहीं डालता बल्कि रक्त में खराब कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ाता है तथा अच्छे कोलेस्ट्रॉल को घटाता है. इसके परिणामस्वरूप रक्त वाहिनियां ब्लॉक हो जाती हैं, जिससे एथेरोस्क्लेरोसिस जैसी गंभीर स्थिति पैदा होती है. यह दिल के दौरे, एंजाइना और हृदय विफलता तक पहुंच सकती है.
वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि मोटापा स्तन, बड़ी आंत, अग्न्याशय, गर्भाशय और जिगर जैसे कई प्रकार के कैंसर से जुड़ा हुआ है. वसा कोशिकाएं शरीर में अतिरिक्त हार्मोन और सूजनकारी पदार्थ उत्पन्न करती हैं, जो कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि को बढ़ावा देते हैं. यह धीमी लेकिन खतरनाक प्रक्रिया कई वर्षों में कैंसर का रूप ले सकती है.
नींद में दम घुटनामोटे व्यक्तियों में गर्दन और ऊपरी श्वसन मार्ग में वसा अधिक जमा होने लगती है. इससे नींद के दौरान एयरवे संकुचित होती है और सांस रुकने की स्थिति, जिसे स्लीप एपनिया कहा जाता है, उत्पन्न होती है. यह लंबे समय में थकान, हृदय पर दबाव और अचानक नींद में मृत्यु जैसी जटिलताओं को जन्म दे सकती है.
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