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WHO ने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) में फैले इबोला वायरस को बेहद खतरनाक बताते हुए इसका आकलन 'हाई' से 'वेरी हाई' (उच्चतम) श्रेणी में कर दिया है. WHO ने इस प्रकोप और पड़ोसी देश युगांडा में मामलों की पुष्टि के बाद अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है. क्या फिर लगाना पड़ेगा मास्क?
WHO ने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) में फैले इबोला वायरस को बेहद खतरनाक बताते हुए इसका आकलन 'हाई' से 'वेरी हाई' (उच्चतम) श्रेणी में कर दिया है. WHO ने इस प्रकोप और पड़ोसी देश युगांडा में मामलों की पुष्टि के बाद अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है. हालांकि, WHO ने कहा है वैश्विक स्तर इसका खतरा कम है. WHO के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने शुक्रवार को बताया कि अब तक डीआरसी में 82 मामलों और 7 मौतों की पुष्टि हो चुकी है, लगभग 750 संदिग्ध मामले और 177 संदिग्ध मौत भी दर्ज की गई है. उन्होंने कहा कि युगांडा की स्थिति स्थिर है और वहां व्यापक कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग जैसी कार्रवाई प्रभावी साबित हो रही है.
इबोला वायरस के बढ़ते प्रकोप के कारण कई देशों की सरकारें अलर्ट मोड पर आ चुकी हैं, एयरपोर्ट्स पर यात्रियों की स्क्रीनिंग और निगरानी बढ़ा दी गई है. भारत सरकार और अफ्रीकी संघ ने इबोला के प्रकोप को देखते हुए चौथे इंडिया-अफ्रीका फोरम समिट (आईएएफएस IV) को फिलहाल के लिए स्थगित कर दिया है. पहले यह आईएएफएस IV शिखर सम्मेलन का आयोजन 28-31 मई तक नई दिल्ली में होने वाला था.
विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को बयान जारी कर बताया कि दोनों पक्षों ने अफ्रीका के कुछ हिस्सों में बदलती स्वास्थ्य स्थिति पर अपने विचार साझा किए और पूरे महाद्वीप में पब्लिक स्वास्थ्य की तैयारी और रिस्पॉन्स कैपेसिटी को मजबूत करने में लगातार सहयोग के महत्व को दोहराया, इसमें अफ्रीका सीडीसी और संबंधित राष्ट्रीय संस्थान का समर्थन करना भी शामिल है.
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एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इबोला एक संक्रामक रोग है जो चमगादड़ों से फैलता है और संक्रमित व्यक्तियों या जानवरों के शरीर के तरल पदार्थों या दूषित वस्तु के सीधे संपर्क में आने से फैलता है, और दुर्लभ मामलों में हवा के माध्यम से भी फैल सकता है. इसका ऊष्मायन काल (इंक्यूबेशन पीरियड) दो से 21 दिनों तक होता है और इसके शुरुआती लक्षणों में बुखार, थकान, मांसपेशियों में दर्द और गले में खराश शामिल हैं, धीरे-धीरे ये गंभीर लक्षणों में बदल जाते हैं.
मरीजों में इबोला का बंडिबुग्यो स्ट्रेन पाया गया है, जिसके लिए अभी तक कोई प्रभावी टीका उपलब्ध नहीं है.WHO के अनुसार, मनुष्यों पर क्लिनिकल ट्रायल शुरू करने से पहले और समय की आवश्यकता है. बता दें कि संगठन ने पहले इबोला को 'अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' घोषित किया था, साथ ही यह भी स्पष्ट किया था कि ये महामारी के स्तर पर नहीं है.
भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में स्पष्ट कहा है कि देश में अब तक संक्रमण का कोई मामला नहीं मिला है, इसका खतरा कम है. बता दें कि यह एक ऐसी बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के नजदीकी संपर्क में आने से फैलता है. ऐसे में मास्क लगाने से इससे बचाव नहीं होगा. इस संक्रमण से बचाव के लिए जरूरी है कि संक्रमित व्यक्ति के नजदीकी संपर्क में आने से बचें. सरकार ने हाल ही में इससे बचाव के लिए एडवाइजरी जारी की थी. पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें. (इबोला को लेकर भारत सरकार की एडवाइजरी) इनपुट- आईएएनएस
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