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इबोला वायरस से देश में 80 लोगों की गई जान, WHO ने घोषित की 'हेल्थ इमरजेंसी', भारत के लिए कितना खतरा? 

Ebola Virus:  हंता वायरस के बाद अब इबोला वायरस ने दुनियाभर के लोगों की चिंता बढ़ा दी है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन WHO ने कांगो और युगांडा में फैले इबोला के रेयर 'Bundibugyo strain' के प्रकोप के बाद इंटरनेशनल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है. इससे 87 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है...

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इबोला वायरस से देश में 80 लोगों की गई जान, WHO ने घोषित की 'हेल्थ इमरजेंसी', भारत के लिए कितना खतरा? 

Ebola Virus- WHO Global Health Emergency (AI Image)

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Ebola Virus- WHO Global Health Emergency: हंता वायरस के बाद अब इबोला वायरस ने दुनियाभर के लोगों की चिंता बढ़ा दी है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन WHO ने कांगो और युगांडा में फैले इबोला के रेयर 'Bundibugyo strain' के प्रकोप के बाद इंटरनेशनल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, इबोला वायरस से 80 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. अफ्रीकी देशों खासकर कांगो और युगांडा में इस वायरस के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं. कांगो सरकार के मुताबिक, यह वायरस अब कम्युनिटी लेवल पर भी फैल रहा है, जिससे खतरा और बढ़ गया है. 

हेल्थ एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते इसे कंट्रोल नहीं किया गया, तो यह वायरस कई देशों में फैल सकता है. आइए जानते हैं इबोला वायरस है क्या है, भारत में इसका किता खतरा है, इसके लक्षण और बचाव के उपाय क्या हैं...

इबोला वायरस है क्या, कितना खतरनाक नया स्ट्रेन 

इबोला खतरनाक वायरल बीमारी है और यह इंसानों और जानवरों दोनों को संक्रमित कर सकती है. 1976 में अफ्रीका के कांगो क्षेत्र में पहली बार इस वायरस के मामले मिले थे. इसका नाम इबोला नदी के नाम पर रखा गया था. एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह बीमारी शरीर के अंदर गंभीर संक्रमण पैदा करती है और कई मामलों में जानलेवा साबित होती है. 

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WHO के मुताबिक, इबोला वायरस के कई प्रकार होते हैं और इनमें से बुंदीबुग्यो स्ट्रेन काफी दुर्लभ माना जाता है. यह स्ट्रेन पहली बार युगांडा में मिला, ये तेजी से फैल सकता है और इसके लक्षण भी गंभीर हो सकते हैं. इसलिए WHO ने इसे लेकर हाई अलर्ट जारी किया है. 

यह वायरस कैसे फैलता है?

WHO के मुताबिक, इबोला संक्रमित व्यक्ति के खून, पसीने, लार, उल्टी या शरीर के अन्य तरल के संपर्क में आने से फैलता है. इसके अलावा संक्रमित जानवरों से भी यह वायरस इंसानों में आ सकता है, कांगो सरकार ने बताया कि यह वायरस अब कम्युनिटी ट्रांसमिशन के जरिए भी फैल रहा है, यानी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने वाले लोग भी इसकी चपेट में आ सकते हैं. 

इबोला वायरस के लक्षण, बचाव और इलाज 

शुरुआती लक्षण के बारे में बात करें तो इबोला में सामान्य वायरल बुखार जैसे लग सकते हैं, पर धीरे-धीरे यह गंभीर रूप ले सकता है. इसमें तेज बुखार, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी और थकान, गले में दर्द, उल्टी और दस्त, पेट दर्द, त्वचा पर लाल चकत्ते, गंभीर मामलों में शरीर से खून निकलना शामिल है. इस स्थिति में अगर समय पर इलाज न मिले तो मरीज की हालत तेजी से बिगड़ सकती है.

इलाज की बात करें तो फिलहाल इबोला का कोई पूरी तरह पक्का इलाज नहीं है, पर शुरुआती इलाज और सही देखभाल से मरीज की जान बचाया जा सकता है. इसमें मरीज को शरीर में पानी की कमी न होने देना, संक्रमण को कंट्रोल करना और जरूरी दवाएं देना इलाज का हिस्सा होता है.
 
बचाव के लिए जरूरी है कि संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखें, हाथों को बार-बार साबुन से धोएं, मास्क और ग्लव्स का इस्तेमाल करें, संक्रमित जानवरों के संपर्क से बचें, भीड़भाड़ वाली जगहों में सावधानी रखें, कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. 

भारत में इसका कितना खतरा? 

बता दें कि इबोला का भारत में फिलहाल कोई सीधा खतरा नहीं है, देश में इसके फैलने की आशंका भी कम है. यह बीमारी हवा या सामान्य सांस से नहीं फैलती, इसलिए अगर बाहर से कोई मामला आ भी जाए तो स्वास्थ्य मंत्रालय और World Health Organization की निगरानी इसे फैलने से रोकने में सक्षम है. हालांकि, दूसरे देशों में जो स्थिति है वो चिंताजनक है. ऐसे में इस बीमारी को लेकर सतर्कता और सही जानकारी होना जरूरी है.  

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