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Blood Thinner: जानिए क्‍या होता है ब्‍लड थिनर, किसे पड़ती है इसकी जरूरत?

Who Should Take Blood Thinner: क्‍या आपको पता है कि ब्‍लड थिनर क्‍या होता है? इसे लेने की ज़रूरत कब और किसे पड़ती है? वास्तव में ब्‍लड थिनर का काम क्‍या होता है? इस खबर में ब्‍लड थिनर से जुड़ी सारी जानकारियां मौजूद हैं.

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Blood Thinner: जानिए क्‍या होता है ब्‍लड थिनर, किसे पड़ती है इसकी जरूरत?

जानिए क्‍या होता है ब्‍लड थिनर? और किसे पड़ती है इसकी जरूरत

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डीएनए हिंदी: ब्‍लड थिनर जैसा कि नाम से ही समझ आता है, ब्‍लड को पतला बनाता है. इसकी जरूरत तब होती है जब खून गाढ़ा होता है और इसमें क्‍लॉटिंग की संभावना होती है. जब शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या बढ़ने लगती है तो खून गाढ़ा होने लगता है. इसके अलावा शरीर में प्रोटीन सी और प्रोटीन एस की कमी के कारण भी खून में थक्के बनते हैं. हाई कोलेस्‍ट्रॉल, मोटापा या कोविड संक्रमित लोगों में भी खून में थक्‍के बनने की संभावना ज्‍यादा होती है.
 
जब भी खून गाढ़ा होता है तो इससे ब्‍लड सर्कुलेशन प्रभावित होने लगता है. इससे धमनियों से ब्‍लड आसानी से नहीं गुजर पाता और इससे हार्ट पर प्रेशर पड़ता है. खून कि थिक होने का एक कारण ये भी होता है जब शरीर में एंटी-क्लॉट सिस्टम सही काम नहीं करता. एंटी क्‍लॅाट सिस्‍टम का काम खून की क्लॉटिंग और बहाव के बीच एक बैलेंस बनाना होता है.

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कुछ लोगों में ये बैलेंस बिगड़ जाता है और ब्लड क्लॉट बनने लग जाते हैं, जो सीरियस हो सकता है क्योंकि इससे सप्लाई रूक जाती है और ऑर्गन फेल्योर का खतरा होता है. ऐसे लोगों में ब्लड थिनर इसे रोकता है. ब्लड थिनर असल में खून को पतला नहीं बनाता  और न ही थक्के को तोड़ता है, बल्कि ये खून में नए थक्के बनने से रोकने का काम करता है और धक्‍कों को फैलने से रोकता है. 

किन लोगों को इसकी जरूरत है?
ब्लड थिनर की जरूरत उन लोगों को होती है जिनका खून गाढ़ा होता जाता है और इससे हार्ट पर दबाव पड़ता है या हार्ट अटैक या स्‍ट्रोक का खतरा होता है. अमूमन डीप वेन थ्रोम्बोसिस(deep vein thrombosis-DVT) के मरीजों को इसे लेना पड़ता है. यह एक खतरनाक बीमारी होती है जिसमें खून में थक्का बनात है. वहीं जिन लोगों को  हार्ट या ब्लड वेसल डिजीज है, अनियमित हृदय की गति, ल्यूपस(Lupus) है या कोविड संक्रमण रहा हो उनमें इस दवा की जरूरत होती है.

कई बार हाई कोलेस्‍ट्रॉल के मरीज को भी इसे दिया जाता है. वहीं जिनका वजन ज्यादा है, सर्जरी हुई हो या आर्टिफिशियल हार्ट वॉल्व लगाया गया है उनको भी ब्‍लड थिनर दिया जाता है. आट्रियल फिब्रिलेशन की समस्‍या हो तो भी ब्लड थिनर स्ट्रोक से बचाने के लिए दयिा जाता है. 65 से अधिक उम्र वाले 15% लोगों को आट्रियल फिब्रिलेशन का खतरा रहता है. 

क्या हैं रिस्क?
ब्लड थिनर लेने पर ट्रॉमा या चोट लगने पर जानलेवा ब्लीडिंग हो सकती है. ऐसी गतिविधियों से सावधान रहें जिनसे सिर में चोट लग सकती हो. डॉक्टर की प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर ही दवाओं का सेवन करें, न कि खुद से एंटीकोआगुलंट्स को लें. अगर आप ब्लड थिनर ले रहे हैं तो ध्यान रखें, अपने डॉक्टर को तुरंत बताएं अगर आपको असामान्य रक्तस्राव के कोई लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे:

पीरियड्स में सामान्य से ज्यादा ब्लीडिंग

  • पेशाब या मल में खून
  • मसूड़ों या नाक से खून बहना
  • खून की उल्टी या खांसी होना
  • चक्कर आना
  • कमजोरी
  • गंभीर सिरदर्द या पेट दर्द

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ब्लड थिनर के प्रकार
ब्लड थिनर 2 तरह के होते हैं. पहला, एंटीकोआगुलंट्स (anticoagulants) खून का थक्का बनने या खून की कोशिकाओं को ठोस गुच्छों में बदलकर एकसाथ चिपकने से रोकते हैं. ये ज्यादातर टैबलेट के रूप में आते हैं, हालांकि कुछ जैसे हेपरिन, फोंडापैरिनक्स, डाल्टेपैरिन और एनोक्सापैरिन (Heparin, Fondaparinux, Dalteparin and Enoxaparin) शॉट या इंट्रावेनस इंफ्यूजन के जरिये दिया जाता है. दूसरे को एंटीप्लेटलेट्स(Antiplatelets) कहा जाता है. ये प्लेटलेट्स को टारगेट करते हैं और टैबलेट के रूप में आते हैं.

 

(Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ से परामर्श करें.) 

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