सेहत
Drugs Rules, 1945 Amendment: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 में संशोधन करते हुए अनुसूची K से 'सिरप' शब्द हटा दिया है. इस बदलाव के बाद अब कोई भी कफ और अन्य सिरप बिना डॉक्टर के वैध प्रिस्क्रिप्शन पर्चे के ओवर-द-काउंटर (OTC) नहीं खरीद सकेंगे.
Major Amendment To The Drugs Rules, 1945: मध्य प्रदेश और राजस्थान समेत देश के कई हिस्सों में दूषित (जहरीले) कफ सिरप के सेवन से बच्चों की दुखद मौतों और खांसी की दवाओं (Cough Syrup) के नशे के रूप में दुरुपयोग के मामलों के बाद केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 में संशोधन करते हुए अनुसूची K से 'सिरप' शब्द हटा दिया है. इस बदलाव के बाद अब कोई भी कफ और अन्य सिरप बिना डॉक्टर के वैध प्रिस्क्रिप्शन पर्चे के ओवर-द-काउंटर (OTC) नहीं खरीद सकेंगे. सरकार ने यह फैसला दवाओं के सुरक्षित उपयोग और उनकी अनियंत्रित बिक्री पर रोक लगाने के उद्देश्य से लिया है.
बता दें कि नए नियम "औषधि (पांचवां संशोधन) नियम, 2026" राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से लागू हो गए हैं. मंत्रालय के अनुसार, इस संशोधन से पहले दिसंबर 2025 में जारी मसौदा अधिसूचना पर जनता से सुझाव और आपत्तियां मांगी गई थीं, जिन पर विचार करने के बाद अंतिम फैसला लिया गया. आसान शब्दों में कहें तो अब सिरप आधारित दवाओं, खासकर कफ सिरप की बिक्री पर पहले की तुलना में अधिक सख्ती लागू होगी, क्योंकि उन्हें अनुसूची K के तहत मिलने वाली छूट हटा दी गई है.
हालांकि, ड्रग्स रूल्स में संशोधन के बाद, खांसी के लिए लोज़ेंज, गोलियां और टैबलेट अभी भी ओवर-द-काउंटर उपलब्ध रहेंगी. 9 जून 2026 को जारी अधिसूचना के साथ लागू भी हो गया है. बता दें कि पिछले साल मध्य प्रदेश में मिलावटी खांसी की सिरप पीने से 24 बच्चों की मौत हो गई थी. देश के अन्य राज्यों से भी इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं.
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Schedule K, Drugs and Cosmetics Rules, 1945 का एक हिस्सा है और इसमें कुछ दवाओं और विशेष परिस्थितियों को सामान्य दवा बिक्री नियमों से छूट दी जाती है. इसके तहत कुछ डॉक्टर, सरकारी कार्यक्रम और अधिकृत संस्थान तय शर्तों के साथ दवाओं का स्टॉक और वितरण कर सकते हैं. Schedule K की क्रम संख्या 13 मुख्य रूप से रजिस्टर्ड डॉक्टरों से जुड़ी है. अब नए संशोधन में Schedule K की क्रम संख्या 13 से ‘Syrups’ शब्द हटा दिया गया है.
यानी औषधीय सिरप, जिनमें कफ सिरप भी शामिल हैं अब इस छूट के दायरे में नहीं रहेंगे. अब इनके स्टोरेज, वितरण और बिक्री पर सामान्य दवा नियम अधिक सख्ती से लागू होंगे और निगरानी भी बढ़ेगी. पहले इस शेड्यूल के तहत सिरप को ओवर-द-काउंटर (OTC) आसानी से और बिना पर्चे के बेचने की छूट मिली हुई थी.
Drugs Rules- 1945 में बदलाव के बाद अब कुछ कफ सिरप और औषधीय सिरप पहले की तरह आसानी से उपलब्ध नहीं हो सकते हैं. डॉक्टर की सलाह या पर्ची की जरूरी हो सकती है. इसका असर ग्रामीण और छोटे इलाकों में ज्यादा दिख सकता है, क्योंकि छोटे कस्बों और गांवों में रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर्स (डॉक्टरों) की कमी होती है. ऐसे में मामूली सर्दी-जुकाम या खांसी के लिए भी लोगों को डॉक्टर की पर्ची (Prescription) बनवाने के लिए इंतजार करना पड़ सकता है.
यह संशोधन मुख्य रूप से दूषित कफ सिरप के कारण होने वाले नुकसान और मौतों को रोकने के लिए किया गया है. सरकार का दावा है कि इससे दवाओं के दुरुपयोग पर रोक लगेगी और स्वास्थ्य सुरक्षा बेहतर होगी. लेकिन, आम जन के बीच सबसे बड़ा सवाल यह पैदा हो रहा है कि इस सख्ती का असर आम मरीजों की पहुंच और इलाज की सुविधा पर भी पड़ेगा.
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