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Covid-19 Update: एशिया के कुछ देशों में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ने लगे हैं, भारत में भी अब तक 257 एक्टिव केस देखने को मिले हैं. ऐसे में कोविड का नया वैरिएंट JN.1 क्या दोबारा परेशानी खड़ी करेगा? आइए जानते हैं इसके बारे में...
Covid-19 Update: 2019 से शुरू हुआ कोरोना वायरस अभी तक दुनियाभर में चिंता का विषय बना हुआ है, इसके नए-नए वैरिएंट रह-रह कर सामने आते रहते हैं. अब फिर से कुछ देशों में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ने लगे हैं. सिंगापुर, हांगकांग और थाईलैंड जैसे देशों में कोविड के नए मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है.
यहां JN.1 और उसके सब-वैरिएंट ही ज्यादा पाए जा रहे हैं. भारत में केरल, तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसी जगहों से ज्यादा केस देखे जा रहे हैं. ऐसे में आइए जान लेते हैं कोविड का नया वैरिएंट JN.1 क्या दोबारा परेशानी खड़ी करेगा और यह वैरिएंट कितना खतरनाक है...
सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 12 मई से अब तक अपडेट हुए डैशबोर्ड पर कुल 257 एक्टिव केस दिख रहे हैं. इनमें ज्यादातर मामले केरल, तमिलनाडु और महाराष्ट्र से हैं. हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये आंकड़ा देश की बड़ी आबादी को देखते हुए भले ही बहुत कम है. लेकिन इसे पूरी तरह से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. खासतौर से इस स्थिति में जब एशिया के कई देशों जैसे हांगकांग और सिंगापुर में कोरोना संक्रमण एक बार फिर तेजी से फैल रहा है.
पहली बार अगस्त 2023 में JN.1 नाम का कोविड का नया वैरिएंट मिला था, जिसे ‘वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट’ घोषित किया गया था. बता दें कि ये Omicron BA.2.86 का वंशज है और इसमें करीब 30 म्यूटेशन पाए गए हैं, इनमें LF.7 और NB.1.8 के मामले सबसे ज्यादा देखे गए हैं.
एक्सपर्ट्स के मुताबिक अभी तक ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है, जिससे यह कहा जा सके कि ये वैरिएंट ज्यादा जानलेवा या तेजी से फैलने वाला है. लेकिन इससे सतर्क रहना बहुत ही जरूरी है, ताकी 2020-21 जैसी तबाही का सामना दोबारा न करना पड़े. ऐसी स्थिति में हर किसी के लिए जरूरी है कि वह सावधानी बरतें, इसे हल्के में न लें.
सिंगापुर, हांगकांग और थाईलैंड जैसे एशिया के कई देशों में, जहां कोरोना फैल रहा है वहां इसके पीछे लोगों में एंटीबॉडी का कम हो जाना एक कारण है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक यही हाल भारत में भी हो सकता है. तमिलनाडु, केरल और महाराष्ट्र में हल्की बढ़ोतरी दिख रही है.
इस स्थिति में कमजोर इम्यूनिटी वालों को थोड़ा संभलकर रहने की जरूरत है. क्योंकि ऐसे लोगों को ये आसानी से अपना निशाना बना सकता है. फिलहाल जो मामले दिख रहे हैं वो लॉकडाउन लगने के संकेत नहीं हैं, हालांकि इसको लेकर कोई लापरवाही न बरतें और कोविड से बचाव के नियमों का पालन करें.
(Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है. इस पर अमल करने से पहले विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें.)
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