सेहत
Chardham Yatra 2025: 30 अप्रैल 2025 से इस बार चारधाम यात्रा शुरू हो गई थी, तब से लेकर अब तक 80 से ज्यादा श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है. इनमें से ज्यादातर तीर्थयात्रियों की मौत स्वास्थ्य संबंधी कारणों के चलते हुई है...
हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु चारधाम (Chardham Yatra) की यात्रा पर जाते हैं. 30 अप्रैल 2025 से इस बार चारधाम यात्रा शुरू हो गई थी, तब से लेकर अब तक 80 से ज्यादा श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनमें से सबसे ज्यादा मौतें केदारनाथ धाम में हुई हैं. बताया जा रहा है कि इनमें से ज्यादातर लोगों की मौत अत्यधिक थकान, स्वास्थ्य समस्याओं के अलावा अन्य दूसरे कारणों की वजह से हुई है. ऐसे में आइए जानते हैं आखिर क्यों चारधाम की यात्रा में लोगों की सांसें टूट रही हैं...
रिपोर्ट्स के मुताबिक अधिकांश लोगों की मौत ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी, हार्ट अटैक और सांस लेने में तकलीफ के कारण हुई है. बताया जा रहा है कि मरने वालों में कई बुजुर्ग और पहले से बीमार यात्री भी थे, जिनकी पुरानी मेडिकल हिस्ट्री रही है. अधिकतर को हार्ट अटैक और पल्मोनरी ए़डिमा हुआ. इसके अलावा इन मौतों एक बड़ा कारण Altitude Sickness (ऊंचाई से बीमारी) माना जा रहा है, जिसे ऊंचाई पर होने वाली बीमारी भी कह सकते है. इसके बारे में कम ही लोगों को जानकारी है.
केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम समुद्र तल से 3,000 से 3,500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं, पहाड़ों पर ऊंचाई जैसे-जैसे बढ़ती है, हवा में ऑक्सीजन लेवल कम होता जाता है. ऐसी स्थिति में शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है, जिससे दबाव बढ़ता है और सांस लेने में दिक्कत होने जैसी समस्याएं होने लगती है.
बता दें कि मैदानी इलाकों से सीधे पहाड़ों पर चढ़ने वाले लोगों के लिए यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है. यह स्थिति उन लोगों के लिए ज्यादा खतरनाक होती है, जो मैदानी इलाकों में रहते हैं. क्योंकि ऊंचाई पर रहना उनके शरीर के लिए नया अनुभव होता है.
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, 50 साल से ऊपर के यात्री स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद यात्रा पर अड़ जाते हैं, जिससे इस तरह की घटनाएं होती हैं. विभाग का दावा है कि इस बार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दी गई हैं. लेकिन यात्री सावधानी नहीं बरत रहे हैं.