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Breast Cancer: इन महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर का खतरा होता है ज्यादा, इस उम्र से कराना चाहिए टेस्ट

Breast Cancer Awareness: ब्रेस्ट कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और कम उम्र की महिलाओं में यह समस्या ज्यादा नजर आ रही है.

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Breast Cancer: इन महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर का खतरा होता है ज्यादा, इस उम्र से कराना चाहिए टेस्ट
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डीएनए हिंदीः किसी समय में ब्रेस्ट कैंसर की संभावना 50 की उम्र के बाद होती थीं लेकिन अब 30 साल की युवतियों भी इससे जूझ रही हैं. खानपान और लाइफस्टाइल के कारण अब इस कैंसर का उम्र से कोई ताल्लुक नहीं रहा. 

ब्रेस्ट कैंसर में स्तन के आसपास कोशिकाओं की अनियंत्रित बढ़ोतरी होने लगती है और लोब्यूल्स और दुग्ध नलिकाओं में ये कैसरस कोशिकाएं हेल्दी कोशिकाओं को डैमेज करने लगती हैं. कुछ मामलों में ब्रेस्ट कैंसर स्तन के अन्य ऊतकों को भी प्रभावित करने लगता है. 

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ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कुछ महिलाओं में ज्यादा होता है. ब्रेस्ट कैंसर के प्रति अवेयरनेस से ही इस बीमारी से बचा जा सकता है. तो चलिए जानें कि ब्रेस्ट कैंसर का खतरा किसे ज्यादा होता है और इसके लक्षण और बचाव क्या हैं. 

ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआत कैसे होती है
जब ब्रेस्ट वाहनियों में छोटे कठोर से कण जमने लगते हैं या स्तन में कहीं गांठ या टिश्यू एक जगह इक्ठ्ठा होने लगते हैं तब इसमें कैंसर का खतरा होता है. वैसे भी शरीर में कहीं भी असमान कोशिकाओं का एकत्र होना खतरे का संकेत होता है. 

ब्रेस्ट  कैंसर आमतौर पर कहां होता है
अधिकांश ब्रेस्ट कैंसर नलिकाओं या लोब्यूल्स में शुरू होता है. ब्रेस्ट  कैंसर रक्त वाहिकाओं और लसीका वाहिकाओं के माध्यम से स्तन के बाहर फैलने लगता है. ब्रेस्ट कैंसर जब शरीर के अन्य भागों में फैलने लगता है तो इसे मेटास्टेसिस कहा जाता है. 

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कई मामलों में महिलाओं में स्तन कैंसर के लक्षण जल्दी दिखने लगते हैं लेकिन जानकारी के अभाव में ये कई बार लास्ट स्टेज में पकड़ में आता है. इसलिए जरूरी है कि इसके लक्षणों को समझा जाए. 

ये लक्षण दिखें तो जांच करवाना जरूरी
40 की उम्र के बाद से हर महिला को हर 6 महीने में एक बार अपने ब्रेस्ट की स्क्रिनिंग जरूर करानी चाहिए. अगर ब्रेस्ट पर किसी भी तरह का गांठ, भले ही वह दर्दरहित हो, ब्रेस्ट के निप्पल से तरल चीजों का निकलना, ब्रेस्ट में लंप्स महसूस होना, निपल के साइज में अंदर, दोनों ब्रेस्ट के साइट और शेप में अंतर नजर आए तो इसे नजरअंदाज न करें और इसकी जांच कराएं. एक्स-रे मैमोग्राफी, सीटी स्कैन और पीईटी स्कैन जैसे जांच से ब्रेस्ट कैंसर का पता आसानी से लगाया जा सकता है. 

ब्रेस्ट कैंसर के 5 चेतावनी संकेत 
ब्रेस्ट पर, बांह या अंडर आर्म्स में गांठ का होना. ब्रेस्ट का उंचा या टेड़ा-मेड़ा होना. स्तन या फिर निप्पल का लाल या रंगहीन पानी का लगातार निकलना. अगर कोई गांठ बन गई है और उसमें दर्द नहीं है तो कैंसर होने की आशंका ज्यादा है. दर्द है तो कैंसर की आशंका कम है. पीरियड्स के दिनों के आसपास भी ब्रेस्ट में गांठें बन जाती हैं लेकिन उनमें दर्द होता है.

इन महिलाओं को होता है कैंसर का ज्यादा खतरा
जिन महिलाओं के घर में कैंसर का इतिहास रहा हो या घर में किसी को ब्रेस्ट कैंसर हुआ हो. वहीं 
जो बहुत ज्यादा स्मोकिंग-शराब पीती हैं उनमें ब्रेस्ट कैंसर का खतरा ज्यादा होता है. कुछ विटामिन्स की कमी जैसे विटामिन डी और बी कॉप्लेक्स और मिनरल्स की कमी के कारण भी  खतरा ज्यादा होता है. 

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इन तरीकों से रोका जा सकता है ब्रेस्ट कैंसर
लाइफस्टाइल को सही रखकर,खान-पान और जरूरी विटामिन्स आदि पर ध्यान देना बेहद जरूरी है. स्मोकिंग और शराब से दूर रहें. रोजाना व्यायाम या एरोबिक्स भी मददगार होगा. जिन महिलाओं ने जन्म दिया है उन्हें अपने बच्चों को स्तनपान कराना चाहिए. कई अध्ययनों से पता चला है कि स्तनपान कराने से स्तन कैंसर का खतरा काफी कम हो जाता है.

Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें.) 

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