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Antivenom: 20 साल की मेहनत, 200 से ज्यादा बार सांपों से कटवाया, अब शख्स का खून बना जहर का तोड़!

Antivenom Breakthrough: अमेरिका में रहने वाले एक शख्स ने जहर का तोड़ खोजने के लिए बीते 20 सालों में 200 बार खुद को जहरीले सांपों से कटवाया, अब व्यक्ति के खून में मौजूद एंटीबॉडीज के इस्तेमाल से दवा बनाई जा रही है...

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Antivenom: 20 साल की मेहनत, 200 से ज्यादा बार सांपों से कटवाया, अब शख्स का खून बना जहर का तोड़!

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आंकड़ों की मानें तो दुनियाभर में हर साल करीब 1 लाख 40 हजार लोगों की मौत सांप के काटने (Snake Bite) से हो जाती है, वहीं सांप के जहर (Antivenom) फैलने से हर साल करीब 5 लाख लोगों को अपने अंग कटवाने पड़ जाते हैं या फिर वह स्थायी तौर पर विकलांग हो जाते हैं. लेकिन, अमेरिका में रहने वाले एक शख्स ने जहर का तोड़ खोजने के लिए बीते 20 सालों में 200 बार खुद को जहरीले सांपों से कटवाया, इससे शख्स के खून में सांप के जहर (Snake Venom) को बेअसर करने की क्षमता आ गई और अब व्यक्ति के खून में मौजूद एंटीबॉडीज (Human Antibodies) के इस्तेमाल से दवा बनाई जा रही है... 

जहरीले सांपों से कटवाया

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक व्यक्ति का नाम टिम फ्रीडे है, बताया जा रहा है कि फ्रीडे ने 2001 से खुद को जहरीले सांपों से कटवाना शुरू किया और करीब दो दशक तक खुद को जानबूझकर सांपों के जहर का इंजेक्शन लगाया, इनमें मंबा, कोबरा, ताइपन और करैत जैसे खतरनाक जहरीले सांप शामिल थे. ऐसे में उनके शरीर में धीरे-धीरे एंटीबॉडी विकसित होनी शुरू हो गई.   

एक्सपर्ट्स के मुताबिक टिम के खून से ऐसा एंटीवेनम तैयार करने में मदद मिल सकती है, जो सभी तरह के सांपों के काटने पर इस्तेमाल की जा सके. वहीं जानवरों पर हुए टेस्ट में ये पाया गया है कि टिम के खून में मिले एंटीबॉडीज सांप के जहर के कई घातक प्रभावों से सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं.

टिम फ्रीडे के खून से 2 एंटीबॉडीज मिलीं

एक्सपर्ट्स के मुताबिक फ्रीडे के खून से 2 एंटीबॉडीज मिलीं, जो कई सांपों के जहर को बेअसर करती हैं. ऐसे में इससे इसका लक्ष्य एक ऐसा इलाज बनाना है, जो कई सांपों के जहर पर काम करे. बता दें कि यह शोध शुरुआती है और चूहों पर इसका टेस्ट हुआ है. इंसानों पर इसके परीक्षण में अभी सालों लगेंगे. 

किस जानवर के खून से बनता है एंटीवेनम

आम तौर पर एंटीवेनम को तैयार करने के लिए घोड़ों को सांप के जहर की मामूली मात्रा दी जाती है और इसकी मदद से एंटीबॉडी विकसित कर उससे एंटीवेनम बनाया जाता है. एक देश में बना एंटीवेनम दूसरे देश में पाए जाने वाले उसी सांप के लिए उतना असरदार नहीं होता है. 

फ्रीडे के एंटीबॉडी से जो एंटीवेनम तैयार किया जा रहा है, उसका मनुष्यों पर परीक्षण नहीं किया गया है. लेकिन यह माना जा रहा है कि इसका पारंपरिक तरीके से तैयार किए जाने वाले एंटीवेनम के मुकाबले दुष्प्रभाव कम होगा. 

(Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है. इस पर अमल करने से पहले विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें.)

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