सेहत
फिलहाल कोरोना ने फिर से कहर बरपाना शुरू कर दिया है. अधिकांश देशों में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं.अब वैज्ञानिकों ने एक रहस्यमयी जीवाणु की खोज की है, जिसकी खासियत यह है कि इसे जीवित रहने के लिए ज्यादा कुछ नहीं चाहिए और यह प्रतिकूल परिस्थितियों में भी जीवित रहता है. इससे चिंता बढ़ गई है.
कोरोना के बीच एक ऐसे बैक्टीरिया की मौजूदगी चीन के स्पेस स्टेशन में देख कर वैज्ञानिक चिंतित हैं जिसे खत्म करना संभव नहीं है. वैज्ञानिकों ने चीन के तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन पर एक ऐसा जीवाणु खोजा है, जो बेहद रहस्यमय है. यह खोज अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य के बारे में एक बड़ा सवाल खड़ा कर रही है. यह बैक्टीरिया कहां से आया और क्या यह अंतरिक्ष में रहने वालों के लिए खतरा बन सकता है?
कौन सा बैक्टीरिया है?
द सन के अनुसार, इस जीवाणु का नाम नोवोहर्बैसिलस तियांगोंगेंसिस (एन. तियांगोंगेंसिस) है. शेनझोउ स्पेस बायोटेक्नोलॉजी ग्रुप और बीजिंग इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेसक्राफ्ट सिस्टम इंजीनियरिंग के वैज्ञानिकों के अनुसार, बैक्टीरिया तियांगोंग तक कैसे पहुंचा, यह अभी भी एक रहस्य है. क्या वे बीजाणुओं के रूप में पृथ्वी से आये थे या फिर उनकी उत्पत्ति अंतरिक्ष स्टेशन के विशेष वातावरण में हुई थी? वैज्ञानिकों के पास अभी तक इसका उत्तर नहीं है.
हाल ही में एक माइक्रोबायोलॉजी जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार, ये नए बैक्टीरिया जिलेटिन को तोड़कर उसमें से नाइट्रोजन और कार्बन निकाल सकते हैं. यह विशेषता इसे अद्वितीय बनाती है. इससे यह जीवाणु कठिन परिस्थितियों में भी अपने चारों ओर एक मजबूत सुरक्षा कवच बना लेता है.
इसकी प्रजातियां पृथ्वी पर भी मौजूद हैं
आश्चर्य की बात यह है कि इस बैक्टीरिया की एक प्रजाति पृथ्वी पर भी मौजूद है, जो कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में सेप्सिस जैसी खतरनाक बीमारी फैला सकती है. पृथ्वी पर बैक्टीरिया की यह प्रजाति अन्य चीजें खाकर जीवित रहती है, लेकिन अंतरिक्ष में ये बैक्टीरिया पूरी तरह जिलेटिन पर निर्भर रहते हैं. इस नये बल और इसकी सापेक्षता की खतरनाक प्रकृति को देखते हुए, वैज्ञानिकों को चिंता है कि इससे अंतरिक्ष यात्रियों के लिए परेशानी खड़ी हो सकती है.
विशेष फिल्टर सिस्टम के बाद भी रहेगा खतरा
तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन पर अंतरिक्ष यात्री नियमित रूप से सतहों को कीटाणुरहित करते हैं और बैक्टीरिया पर बारीकी से नजर रखते हैं. स्टेशन में हवा को स्वच्छ करने के लिए विशेष फिल्टर सिस्टम भी लगाए गए हैं. फिर भी, पृथ्वी की तरह ही, अंतरिक्ष में भी जीवाणु जनित रोगों को पूरी तरह से रोकना कठिन है. अब एन. तियांगोंगेंसिस बैक्टीरिया के बारे में सवाल यह है कि क्या यह नई समस्याएं पैदा करेगा या यह सिर्फ एक अनोखी वैज्ञानिक खोज है. यह बात धीरे-धीरे स्पष्ट हो जायेगी.
(Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है. अभी इस बैक्टिरिया पर रिसर्च चल रही है.)
अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें हमारे गूगल, फेसबुक, x, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से.