सेहत
केरल में 430 सक्रिय मामले और दो मौतें दर्ज की गईं, महाराष्ट्र में 209 सक्रिय मामले और चार मौतें दर्ज की गईं, जबकि दिल्ली में 19 से 26 मई के बीच 105 सक्रिय मामले दर्ज किए गए. भारत के 20 राज्यों में कोविड एक्टिव हो चुका है.
भारत में कोविड-19 के मामलों में बढ़ोतरी दिखने लगी है और सरकारी आंकड़ों के अनुसार केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों में सबसे अधिक संख्या में मामले सामने आ रहे हैं. 26 मई तक, भारत में 1,009 सक्रिय मामले हैं, जिनमें से 700 से अधिक मामले पिछले सप्ताह ही सामने आए हैं. 5-12 मई के सप्ताह के दौरान 93 मामले सामने आए, जबकि 13-19 मई के दौरान यह संख्या बढ़कर 164 हो गई. साउथ समेत दिल्ली-एनसीआर में भी कोरोना के मामले बढ़ें हैं. भारत के 20 राज्यों में कोविड एक्टिव हो चुका है.
7 लोगों की हो चुकी है मौत
पिछले हफ़्ते में 7 लोगों की मौत कोरोना वायरस की चपेट में आने से हुई है. 19 मई तक देश में कोविड-19 से सिर्फ़ एक मौत दर्ज की गई थी. जबकि हफ्ते भर में और मौतों से लोगों के मन में डर बैठने लगा है.
हालांकि, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कहा कि चिंता की कोई बात नहीं है. आईसीएमआर महानिदेशक ने कहा, "फिलहाल, गंभीरता आम तौर पर कम है. चिंता की कोई बात नहीं है. हमें सतर्क रहना चाहिए और हमें हमेशा तैयार रहना चाहिए."
डॉ. बहल ने मामलों में वृद्धि देखी है - पहले दक्षिण में, फिर पश्चिम में और अब उत्तर भारत में. उन्होंने कहा कि सभी मामलों की निगरानी एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) के माध्यम से की जा रही है. उन्होंने कहा, "लोगों को तत्काल कोई कदम उठाने की ज़रूरत नहीं है. उन्हें सामान्य सावधानियाँ बरतनी चाहिए. अभी कुछ ख़ास करने की ज़रूरत नहीं है."
बूस्टर डोज की जरूरत के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि टीकाकरण की अभी कोई जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा, "भारत में वैक्सीन बनाने की क्षमता है और जरूरत पड़ने पर हम कोई भी वैक्सीन जल्दी बना सकते हैं."
नए सब वैरिएंट्स मिले, लेकिन डरने की जरूरत नहीं
भारत में नए NB.1.8.1 और LF.7 कोविड स्ट्रेन के मामले सामने आए; विशेषज्ञों ने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है भारत में COVID-19 मामलों में वृद्धि कई दक्षिण पूर्व एशियाई देशों, विशेष रूप से हांगकांग, सिंगापुर, चीन और थाईलैंड में मामलों में तेज वृद्धि के साथ मेल खाती है.
भारतीय SARS-CoV-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (INSACOG) के अनुसार, भारत में उभरते हुए वेरिएंट NB.1.8.1 का एक मामला और LF.7 प्रकार के चार मामले सामने आए हैं. अप्रैल में तमिलनाडु में NB.1.8.1 का एक मामला सामने आया था, जबकि मई में गुजरात में LF.7 के चार मामले सामने आए थे.
नए वेरिएंट के बारे में बात करते हुए डॉ. बहल ने कहा कि पश्चिमी और दक्षिणी भारत से लिए गए नमूनों की जीनोम सीक्वेंसिंग से पता चलता है कि ये नए वेरिएंट गंभीर नहीं हैं और ये एलएफ.7, एक्सएफजी, जेएन.1 और एनबी.1.8.1 सहित ओमिक्रॉन सब-लाइनेज से संबंधित हैं. उन्होंने कहा कि पहले तीन वेरिएंट ज़्यादा प्रचलित हैं.
क्या और नए सब-वैरिएंट्स भी हैं?
"अन्य क्षेत्रों से प्राप्त नमूनों का अनुक्रमण किया जा रहा है और हमें एक या दो दिन में पता चल जाएगा कि क्या और भी वेरिएंट हैं."
कहां-कहां मिले अब तक केस
1,000 से अधिक सक्रिय मामलों में से, केरल में 19-26 मई के सप्ताह के दौरान 430 मामले सामने आए, जबकि 19 मई तक 95 मामले थे. दक्षिणी राज्य में दो मौतें भी हुईं.
महाराष्ट्र में 209 सक्रिय मामले और चार मौतें दर्ज की गईं, जो 19 मई तक 56 मामलों से काफी अधिक है.
कर्नाटक में भी मामलों में वृद्धि देखी जा रही है, जहां 26 मई तक 47 सक्रिय मामले थे, जबकि 19 मई तक यह संख्या 13 थी. एक व्यक्ति की मौत की खबर है.
COVID-19 मामलों की रिपोर्ट करने वाले अन्य राज्यों में गुजरात (19 मई तक सात की तुलना में 83), उत्तर प्रदेश (शून्य की तुलना में 15), पश्चिम बंगाल (एक की तुलना में 12) और तमिलनाडु (66 की तुलना में 69) शामिल हैं.
दिल्ली में भी मामलों में वृद्धि देखी गई है.
केरल स्थित स्वास्थ्य डेटा विश्लेषक कृष्ण प्रसाद के अनुसार, राजधानी में 105 सक्रिय मामले दर्ज किए गए , जबकि 19 मई को यह संख्या सिर्फ़ पाँच थी. उन्होंने कहा, "दिल्ली में एक हफ़्ते के भीतर मामलों में तेज़ी से वृद्धि देखी गई है. 19-26 मई के बीच दिल्ली में 99 सक्रिय मामले दर्ज किए गए. 19 मई तक सिर्फ़ पांच मामले थे."
इन 3 बिंदुओं पर कोरोना फैलते ही रखी जाती है नजर
आईसीएमआर महानिदेशक ने कहा कि जब मामले बढ़ते हैं, तो तीन कारकों पर विचार किया जाता है. "यह इस बात पर निर्भर करता है कि वायरस कितना संक्रामक है - मामले कितनी तेज़ी से बढ़ते हैं. पहले, हमने दो दिनों में मामलों को दोगुना होते देखा था, लेकिन वर्तमान में, वृद्धि धीमी है.
डॉ. बहल ने कहा, "दूसरा, हम यह आकलन करते हैं कि क्या नए वेरिएंट पहले से मौजूद प्रतिरक्षा को चकमा दे रहे हैं - चाहे वे प्राकृतिक हों या वैक्सीन से प्रेरित. लेकिन फिलहाल चिंता की कोई बात नहीं है."उन्होंने कहा कि तीसरा कारक सभी कोविड मामलों में गंभीर मामलों का प्रतिशत है.
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