सेहत
फेफड़ों के कैंसर धीरे-धीरे लंग्स को गला देता है लेकिन इसका पता अधिकतर लास्ट स्टेज में चलता है, कुछ लक्षणों और आदतों को सुधाकर कर इससे बचा जा सकता है.
डीएनए हिंदीः फेफड़े का कैंसर (Lung Cancer) कोरोना संक्रमण के कारण और भी बढ़ गया है. उपर से कुछ गलत आदतों के कारण भी लंग्स कैंसर का खतरा बढ़ गया है. कुछ खराब खानपान की आदते फेफड़े को अंदर ही अंदर गलाने लगती है और इसका पता तब चलता है जब लंग्स अपनी अंतिम सांसे ले रहे होते हैं. फेफड़े को कैंसर से बचाने के लिए (Prevent Lung Cancer) लिए 5 उपाय पर ध्यान दे दिया जाए तो एक हेल्दी लाइफ जी जा सकेगी.
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फेफड़े का कैंसर का कारण?
फेफड़े के कैंसर का सबसे बड़ा कारण तम्बाकू, धूम्रपान, वायु प्रदूषण, रेडिएशन के संपर्क में आना, कोयला और बेरिलियम जैसे रसायनों के संपर्क में आने के साथ ही लंग्स इंफेक्शन भी होता है, साथ ही कई बार ये जेनेटिक भी होता है और जेनेटिक वाले लोगों को लंग्स कैंसर के कारणों को जानकर बहुत ही हेल्दी लाइफ जीनी चाहिए.
बता दें कि फेफड़ों के कैंसर में लंग्स के टिश्यू में खतरनाक कोशिकाएं बन जाती हैं. स्मॉल सेल लंग कैंसर और नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर फेफड़े के कैंसर के दो मुख्य प्रकार हैं. तो चलिए जानें कि किन-किन उपायों के जरिए फेफड़ों के कैंसर के जोखिम को कम कर सकते हैं.
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सेकेंड हैंड स्मोकिंग भी देती है कैंसर
सिगरेट-बीड़ी पीने वालों के साथ रहने वालों को सेकेंड हैंड स्मोक का खतरा होता है और इससे भी लंग कैंसर का खतरा बराबर होता है. सिगरेट जैसे कई जहरीले रसायन होते हैं, जो फेफड़ों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं. अपने साथ रहने वालों को स्मोकिंग करने से रोकें या फिर उनसे दूर रहें. Foods For Lungs: फेफड़े को स्ट्रांग बनाती हैं 6 चीजें, बढ़ेगी लंग्स की स्टेमिना
तंबाकू के सेवन से बचें
तंबाकू का सेवन फेफड़ों के कैंसर का प्रमुख कारण है, जो कुल मामलों का लगभग 90% है. सिगरेट, सिगार, पाइप, हुक्का, इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट और तम्बाकू खाना फेफड़ों के लिए खतरनाक हैं. धूम्रपान न करने वालों की तुलना में धूम्रपान करने वालों में फेफड़ों के कैंसर का जोखिम लगभग 20 गुना अधिक होता है. इसलिए फेफड़ों के कैंसर को रोकने या फेफड़ों के कैंसर के खतरे को कम करने का सबसे अच्छा तरीका है कि धूम्रपान तुरंत बंद कर दिया जाए.
रेडिएशन और केमिकल से बचें
रेडिएशन एक्सपोजर, खासकर रेडॉन पूरी दुनिया में इसका एक बड़ा जोखिम कारक है. इससे बचने की कोशिश करें. इसके अलावा एस्बेस्टस, कोयला, सिलिका, बेरिलियम, आर्सेनिक, निकल आदि जैसे हानिकारक रसायनों के लंबे समय तक संपर्क में आने से बचें.
फेफड़े के कैंसर की जांच
समय-समय पर फेफड़ों की जांच कराते रहने से आपको सही और सफल इलाज में मदद मिल सकती है.
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हेल्दी डाइट और एक्सरसाइज जरूरी
अपने खाने में विभिन्न प्रकार के फल-सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करें. इनमें विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में होते हैं. सप्लीमेंट्स की बड़ी खुराक लेने से बचें, क्योंकि ये हानिकारक हो सकते हैं. इसके अलावा रोजाना एक्सरसाइज करने से फेफड़े और अन्य प्रकार के कैंसर के खतरे को कम करने में मदद मिलती है.
(Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें.)
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