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आस्था, हिम्मत और इलाज! Polycystic Kidney Disease से जूझ रहे प्रेमानंद जी महाराज कैसे दे रहे हैं इस बीमारी को मात?

Premanand Ji Maharaj: आपको बता दें कि संत प्रेमानंद महाराज जी की दोनों किडनियां लगभग 19 सालों से खराब है और तब से ही उनका डायलिसिस चल रहा है. जानिए कैसे महाराज जी इस बीमारी को मात दे रहे हैं.

Abhay Sharma | Sep 05, 2025, 05:26 PM IST

1.कौन सी बीमारी से पीड़ित हैं प्रेमानंद महाराज?

कौन सी बीमारी से पीड़ित हैं प्रेमानंद महाराज?
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प्रेमानंद महाराज ऑटोसोमल डोमिनेंट पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज से पीड़ित हैं और ये ऐसी बीमारी है, इस स्थिति में किडनी का आकार बड़ा हो जाता है और किडनी में पानी जमा हो जाता है. फिर धीरे-धीरे गांठे बन जाती हैं और फिर किडनी काम करना बंद कर देती है. इस खतरनाक बीमारी के बावजूद प्रेमानंद जी महाराज एक्टिव रहते हैं.  

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2.कैसे इतने एक्टिव रहते हैं महाराज जी?

कैसे इतने एक्टिव रहते हैं महाराज जी?
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प्रेमानंद महाराज जी को इतनी खतरनाक बीमारी है उसके बाद भी वह एक्टिव और फिट हैं, यह सुन के भी कई लोगों को हैरानी होती है. क्योंकि ऐसी बीमारी में लोग आमतौर पर बिस्तर पकड़ लेते हैं. हालांकि प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि हमारी दोनों किडनी खराब है पर मेरे ठाकुर जी हैं, हमें कोई चिंता नहीं, हम उन्हीं की वजह से जिंदा है और बैठे है.

3.इलाज से चल रहा है शरीर

इलाज से चल रहा है शरीर
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प्रेमानंद जी की साकारात्मक सोच का ही नतीजा है कि उनकी किडनी अभी तक बरकरार है. इसके अलावा वह कहते हैं कि डायलासिस होने की वजह से उनका शरीर चल रहा है और सही से काम कर रहा है. इस बीमारी में बहुत से मरीजों को डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ सकती है. बताया जाता है कि महाराज जी भी हफ्ते में 3 बार डायलिसिस कराते हैं. 

4.2 तरह से होती है डायलिसिस

2 तरह से होती है डायलिसिस
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डायलिसिस मुख्य रूप से 2 तरह से होती है, पहला हेमोडायलिसिस जिसमें एक मशीन के ज़रिए शरीर के बाहर रक्त को फ़िल्टर किया जाता है, जबकि पेरिटोनियल डायलिसिस में पेट की अंदरूनी परत (पेरिटोनियल झिल्ली) का उपयोग रक्त को फ़िल्टर करने के लिए किया जाता है. प्रेमानंद जी महाराज  हेमोडायलिसिस कराते हैं. 

5.क्या दिखते हैं इस बीमारी के लक्षण? 

क्या दिखते हैं इस बीमारी के लक्षण? 
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हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक इसके लक्षण जन्म से पहले या बचपन में ही दिखाई दे सकते हैं. ऐसी स्थिति में हाई ब्लड प्रेशर, पीठ या साइड में दर्द, पेट का बढ़ना, पेशाब में खून आना, किडनी स्टोनबार-बार यूरिन इन्फेक्शन जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं. इस स्थिति में धीरे-धीरे किडनी का काम कम होने लगता है, जिससे क्रॉनिक किडनी डिजीज या किडनी फेलियर की समस्या का सामना करना पड़ सकता है.

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