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जन्म के बाद ही हो सकता है यह खतरनाक कैंसर, दिमाग और हड्डियों में दिखने लगते हैं लक्षण

Retinoblastoma Cancer Symptoms: बच्चों की आंखों का यह कैंसर उनकी आंख के साथ ही उनके जिंदगी तक छीन सकता है.

जन्म के बाद ही हो सकता है यह खतरनाक कैंसर, दिमाग और हड्डियों में दिखने लगते हैं लक्षण
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डीएनए हिंदी: लोग किसी बीमारी से पीड़ित होते हैं तो उन्हें डर नहीं होता है लेकिन कैंसर इतना खतरनाक होता है कि लोग परेशान हो जाते हैं और जीने की उम्मीद तक छोड़ देते हैं. यह एक ऐसी बीमारी है जो कि शरीर को पूरी तरह खोखला कर सकती है. कैंसर कई तरह का होता है जिनमें से एक कैंसर आंख का है. आंख का कैंसर बच्चों में जन्म के साथ ही होता है और इसके चलते ही वह धीरे-धीरे बढ़ने लगता है. बच्चों में इसके लक्षणों का ध्यान रखना जरूरी हो जाता है क्योंकि लापरवाही से यह बीमारी बढ़ती है और जिंदगी मौत पर भी सवाल खड़े हो जाते हैं. 

इस कैंसर के बारे में डॉ. श्रॉफ चैरिटी आई हॉस्पिटल के ऑक्युलर ऑन्कोलॉजी और ऑक्युलोप्लास्टी की निदेशक डॉ. सिमा दास ने विस्तृत जानकारी दी है कि आखिर कैसे आंख का यह कैंसर कितना खतरनाक हो सकता है.जानकारी के मुताबिक बच्चों के रेटिना से पैदा होने वाले सबसे आम आंखों के कैंसर को रेटिनोब्लास्टोमा कहा जाता है.

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कैसे बढ़ता है बीमारी का खतरा

डॉ. सिमा दास ने बताया कि हर 15,000-18,000 जन्मे बच्चों में से लगभग 1 बच्चा इस कैंसर से प्रभावित होता है. ऐसा तब होता है जब बच्चे के माता-पिता या परिवार में किसी को आंखों का यह कैंसर हो. ऐसे में जन्म लेने वाले बच्चे में रेटिनोब्लास्टोमा का खतरा 50% अधिक हो जाता है और यह बच्चों की आंखों की रौशनी के लिए घातक होता है. 

क्या है इस बीमारी के अहम लक्षण

इस खतरनाक बीमारी के लक्षण की बात करें तो आंख में सफेद धब्बा या चमक आमतौर पर इस कैंसर का पहला संकेत है. कभी-कभी इस सफेद धब्बे को तस्वीरों में भी देखा जा सकता है. यह कैंसर सफेद चमक को छोड़कर असिम्पटोमैटिक हो सकता है, इसलिए माता-पिता या देखभाल करने वालों को तुरंत आई स्पेशलिस्ट या आई कैंसर एक्सपर्ट से संपर्क करना चाहिए.

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क्या है आंखों की इस बीमारी का इलाज

इलाज की बात करें तो इसका इलाज संभव है लेकिन आवश्यक यह है कि इसे सही समय पर ही पहचान लिया जाए. शुरुआती चरणों में इस कैंसर का इलाज आमतौर पर लेजर और कीमोथेरेपी के साथ किया जाता है, जो अधिकतर मरीजों के जीवन, आंख और दृष्टि को बचा लेता है. वहीं यदि उपचार बाद में किया गया तो वह गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है और सर्जरी में आंख भी हटानी पड़ सकती हैं. 

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