सेहत
नेशनल डॉक्टर्स डे पर खास बातचीत में एवी हॉस्पिटल, वैशाली (गाजियाबाद) में एनेस्थीसिया और क्रिटिकल केयर विभाग के मेडिकल एडवाइजर और लीड कंसल्टेंट डॉ. (प्रो.) ए.के. सेठी ने आम लोगों के मन में उठने वाले कई सवालों का आसान भाषा में जवाब दिया...
अक्सर लोग सिरदर्द, बुखार, सर्दी-खांसी या शरीर दर्द जैसी सामान्य समस्याओं में बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खा लेते हैं. कई बार इससे तुरंत राहत भी मिल जाती है, लेकिन हर बीमारी का इलाज खुद करना सुरक्षित नहीं होता. कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें नजरअंदाज करना गंभीर समस्या का कारण बन सकता है. ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि आखिर किन परिस्थितियों में डॉक्टर से तुरंत मिलना चाहिए, अस्पताल जाने से पहले मरीज को कौन-कौन सी तैयारियां करनी चाहिए और इलाज के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
नेशनल डॉक्टर्स डे के मौके पर इन्हीं जरूरी सवालों के जवाब जानने के लिए हमने Dr. Arora AVee हॉस्पिटल, वैशाली (गाजियाबाद) में एनेस्थीसिया और क्रिटिकल केयर विभाग के मेडिकल एडवाइजर और लीड कंसल्टेंट डॉ. (प्रो.) ए.के. सेठी से खास बातचीत की. इस बातचीत में उन्होंने आम लोगों के मन में उठने वाले कई सवालों का आसान भाषा में जवाब दिया. उन्होंने बताया कि कब घरेलू इलाज पर्याप्त होता है, कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है. उन्होंने बताया कि अस्पताल जाते समय कौन-से मेडिकल डॉक्यूमेंट्स साथ रखने चाहिए और किन परिस्थितियों में किसी दूसरे एक्सपर्ट डॉक्टर से सेकेंड ओपिनियन लेना मरीज के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है...
कब डॉक्टर के पास जाना चाहिए, इस सवाल पर डॉ. सेठी ने कहा कि कुछ स्थितियां मेडिकल इमरजेंसी होती हैं जैसे सीने में तेज दर्द, सांस लेने में दिक्कत, अचानक बेहोश होना, दौरा पड़ना, अत्यधिक खून का बहना, बहुत तेज बुखार, खून की उल्टी या शरीर के किसी हिस्से में अचानक कमजोरी महसूस होना. ऐसी परिस्थितियों में बिना देर किए तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए. वहीं अगर कोई सामान्य बीमारी भी लंबे समय तक बनी रहे या बार-बार हो रही हो तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय रहते डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.
उन्होंने यह भी बताया कि अस्पताल जाने से पहले मरीजों को अपनी मेडिकल हिस्ट्री व्यवस्थित रखनी चाहिए. मरीज के पास पुराने इलाज से जुड़े डॉक्यूमेंट्स, जांच रिपोर्ट, दवाइयों की लिस्ट, एलर्जी की जानकारी, पहले हुए ऑपरेशन का रिकॉर्ड और अगर डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग या कोई दूसरी पुरानी बीमारी है तो उससे जुड़े सभी डॉक्यूमेंट्स भी साथ होने चाहिए. डॉक्टर से किसी भी बीमारी या आदत को छिपाना नहीं चाहिए क्योंकि सही इलाज पूरी और सही जानकारी पर ही निर्भर करता है.
सेकेंड ओपिनियन के बारे में डॉ. सेठी का कहना है कि अगर मरीज किसी अनुभवी और योग्य डॉक्टर से इलाज करा रहा है तो सबसे पहले उस पर विश्वास रखना चाहिए. हालांकि अगर बीमारी गंभीर हो, किसी बड़े ऑपरेशन की सलाह दी गई हो या मरीज और उसके परिवार के मन में कोई शंका हो, तो दूसरी राय लेना बिल्कुल उचित है. उन्होंने कहा कि एक अच्छा डॉक्टर कभी भी सेकेंड ओपिनियन लेने से नाराज नहीं होता क्योंकि उसका उद्देश्य केवल मरीज का सबसे बेहतर इलाज सुनिश्चित करना होता है. उनके अनुसार सही जानकारी, डॉक्टर पर भरोसा और समय पर इलाज ही अच्छे स्वास्थ्य की सबसे मजबूत नींव हैं.