सेहत
एक्सपर्ट की मानें तो 60 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग और बच्चों को वायु प्रदूषण से अधिक खतरा होता है. लंबे समय तक संपर्क में रहने से हृदय-श्वसन संबंधी रोग (Cardiorespiratory Disease), स्ट्रोक, हार्ट अटैक जैसी समस्या हो सकती है.
देश की राजधानी में सोमवार वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 'गंभीर' श्रेणी में पहुंच गया है. इसका मतलब है कि दिल्ली की हवा जहरीली हो गई है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सजग रहने की सलाह दी है, खासकर उन लोगों को जिन्हें सांस या दिल से जुड़ी बीमारियों से ग्रस्त हैं. आइये जानते हैं कि एक्सपर्ट्स ने इस प्रदूषण से बचने के लिए क्या तरीके बताएं हैं.
सीपीसीबी ऐप समीर के अनुसार, वाजीपुर में सबसे खराब AQI 423 पार गया है, जबकि द्वारका में 417 और अशोक विहार व आनंद विहार में 404-404 दर्ज किया गया. मंगलवार और बुधवार को इसके और खराब होने की आशंका है.
नई दिल्ली स्थित एम्स के सामुदायिक चिकित्सा केंद्र के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. हर्षल आर. साल्वे ने बताया, "वायु प्रदूषण के बढ़ते संपर्क से स्वास्थ्य पर अल्पकालिक और दीर्घकालिक, दोनों तरह के गंभीर प्रभाव पड़ते हैं. अल्पकालिक प्रभावों में अस्थमा, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD), सांस लेने में तकलीफ और आंखों में खुजली शामिल है.''
एक्सपर्ट की मानें तो 60 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग और बच्चों को वायु प्रदूषण से अधिक खतरा होता है. लंबे समय तक संपर्क में रहने से हृदय-श्वसन संबंधी रोग (Cardiorespiratory Disease), स्ट्रोक, हार्ट अटैक, मनोभ्रंश और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं.
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दिल्ली के एक प्रमुख अस्पताल के वरिष्ठ सलाहकार, चेस्ट मेडिसिन, डॉ. उज्ज्वल पारेख ने कहा, "पिछले कुछ दिनों या एक हफ्ते में, दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने लगा है, जिससे सांस की बीमारियों या एलर्जी से ग्रस्त लोगों की परेशानी बढ़ गई है, और अगर पुनर्मूल्यांकन के दौरान बड़ी मात्रा में पटाखे जलाए गए तो यह और भी बढ़ने की उम्मीद है.
पारेख ने कहा, "इसलिए, यह सांस की बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए एक संवेदनशील समय है, क्योंकि इस दौरान उनके लक्षण बढ़ सकते हैं या बिगड़ सकते हैं. उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत स्तर पर कचरा और पराली जलाना बंद करना चाहिए और मरीजों को इनसे दूर रहने चाहिए.
डॉ. पारेख ने प्रदूषण के समय सांस की बीमारी से पीड़ित पेशेंट अपनी सभी दवाएं नियमित रूप से लेते रहें. साथ ही कहा कि ऐसे मरीजों को घर के अंदर, एयर कंडीशनर वाले कमरों में रहना चाहिए, ताकि बढ़े हुए एक्यूआई के दौरान प्रदूषण का प्रभाव उन पर न पड़े या बहुत कम पड़े.
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