सेहत
दशकों से यह कहा जाता रहा है कि लंबे समय से इस्तेमाल किया जा रहा तेल दिल के लिए नुकसानदेह होता है. लेकिन नए शोध ने अब इस बात को गलत साबित कर दिया है.
दिल के मरीजों को कम तेल वाला खाना खाने की सलाह दी जाती है और उन्हें कुछ खास तरह के तेल से बने खाने से परहेज करने की सलाह दी जाती है. अब बाज़ार में हार्ट-फ्रेंडली तेल तक आ चुके हैं. लेकिन यहां हम जिस तेल को दिल के लिए अच्छा बताने जा रहे हैं कभी इसी तेल को दिल के लिए सबसे बुरा माना गया था. नए शोध में कुछ अलग ही जानकारी सामने आई है.
रिसर्च में ये तेल माने गए ज्यादा सही
पुराने ज़माने में लोग सूरजमुखी, अलसी, तिल आदि के बीजों से कोल्ड प्रेसिंग द्वारा तेल निकालते थे. सदियों से लोग इन बीजों के तेल का सेवन करते आए हैं, लेकिन पिछले तीन-चार दशकों से यह कहा जाने लगा है कि यह तेल हृदय के लिए हानिकारक है. बीजों से बने तेल को हृदय के लिए बेहद हानिकारक बताया गया. उसके बाद रिफाइंड, वनस्पति घी आदि का चलन शुरू हुआ, लेकिन कुछ साल पहले रिफाइंड तेल और वनस्पति तेल को हृदय के लिए बेहद हानिकारक माना जाता था.
लेकिन अब एक नए शोध ने इसे गलत साबित कर दिया है. शोध कहता है कि सूरजमुखी, अलसी, तिल आदि के बीजों से मिलने वाले तेल दिल के लिए नुकसानदेह नहीं, बल्कि फायदेमंद होते हैं. दरअसल, यह दावा किया गया है कि ये तेल दिल की बीमारियों से बचाव कर सकते हैं.
अनुसंधान क्या कहता है?
यह शोध अमेरिकन सोसाइटी फॉर न्यूट्रिशन द्वारा किया गया है. शोध के अनुसार, जिन लोगों के शरीर में लिनोलेइक एसिड का स्तर अधिक होता है, उन्हें हृदय रोग और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा कम होता है क्योंकि यह सूजन को कम करता है. लिनोलेइक एसिड इन बीजों में पाया जाता है. हालाँकि, लिनोलेइक एसिड बीज के तेल में भी पाया जाता है. यह सूरजमुखी, कैनोला और तिल जैसे पौधों के बीजों से निकाला जाता है. इस प्रकार, यह इस धारणा को पूरी तरह से खारिज करता है कि बीज का तेल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है.
इंडियाना यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ-ब्लूमिंगटन के एसोसिएट प्रोफेसर केविन सी. माकी ने एक बयान में कहा कि लगभग 1,900 लोगों पर आधारित अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों के प्लाज्मा में लिनोलेइक एसिड का स्तर अधिक था, उनमें हृदय और चयापचय संबंधी बीमारियों के लक्षण कम थे.
मिले मजबूत सबूत
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह शोध पुख्ता सबूतों पर आधारित है. हालाँकि, इसके नतीजे पिछले शोधों जैसे ही हैं. यह शोध रक्त परीक्षणों पर आधारित है, जिससे इसके निष्कर्ष और भी पुख्ता होते हैं. आहार संबंधी रिकॉर्ड या खान-पान की आदतों की जानकारी के बजाय, लिनोलेइक एसिड की मात्रा मापने के लिए एक प्रत्यक्ष बायोमार्कर का इस्तेमाल किया गया. इसके अलावा, सूजन और शुगर मेटाबॉलिज्म से जुड़े मार्करों का भी विश्लेषण किया गया.
माकी ने बताया कि उन्होंने सूजन से जुड़े अन्य संकेतकों पर भी गौर किया और पाया कि जिन लोगों के रक्त में लिनोलेइक एसिड का स्तर ज़्यादा था, उनके हृदय और मधुमेह संबंधी स्वास्थ्य प्रोफ़ाइल बेहतर थे. अब न केवल शोधकर्ता, बल्कि विशेषज्ञ भी मान रहे हैं कि बीज के तेल उतने हानिकारक नहीं हैं जितना दावा किया जाता रहा है. न्यू यॉर्क पोस्ट से बात करते हुए, पोषण विशेषज्ञ केरी बीसन ने कहा कि बीज के तेल वास्तव में बहुत स्वास्थ्यवर्धक होते हैं क्योंकि उनमें संतृप्त वसा कम होती है.
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