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Piyush Mishra At JPSC JSSC Student Protest: झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी पेपर लीक के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन में शामिल हुए पीयूष मिश्रा कौन हैं? जानें उनके शुरुआती जीवन, संघर्ष, परिवार और फिल्मी करियर का पूरा सफर.
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक और कथित गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन इन दिनों सुर्खियों में है. राजधानी रांची में चल रहे इस आंदोलन को समर्थन देने के लिए बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता, गायक और लेखक पीयूष मिश्रा अचानक धरना स्थल पर पहुंचे. छात्रों के आंखों में आंसू और दर्द देखकर उन्होंने अपना प्रसिद्ध गीत 'आरंभ है प्रचंड' सुनाकर उनका हौसला बढ़ाया. एक तरफ जहां झारखंड सरकार और छात्र संगठनों के बीच बातचीत अभी तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है, वहीं पीयूष मिश्रा के इस आंदोलन में शामिल होने के बाद से हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर वह इस विरोध प्रदर्शन में क्यों उतरे और उनका अब तक का सफर कैसा रहा है.
पीयूष मिश्रा भारतीय सिनेमा और थिएटर जगत के एक बेहद सम्मानित और बहुमुखी कलाकार हैं, जो अपनी बेबाक शैली और अनोखे अभिनय के लिए जाने जाते हैं. उनका जन्म 13 जनवरी 1963 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में हुआ था. उनके शुरुआती दिन काफी संघर्षों से भरे थे.
बचपन और गोद लिया जाना: घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण उनका पूरा परिवार उनकी बुआ के यहां रहने चला गया था. चूंकि उनकी बुआ की कोई संतान नहीं थी, इसलिए उन्होंने पीयूष को गोद ले लिया.
बचपन का नाम: क्या आप जानते हैं कि उनका असली और पुराना नाम प्रियकांत शर्मा था? बाद में 10वीं कक्षा में उनका नाम बदलकर पीयूष मिश्रा कर दिया गया.
जिद्दी स्वभाव और कला के प्रति प्रेम: पीयूष बचपन से ही कला के प्रति समर्पित थे, लेकिन उनके परिवार में इस क्षेत्र को कोई खास अहमियत नहीं दी जाती थी. अपनी बात मनवाने के लिए वे कई बार बेहद आक्रामक हो जाते थे और खुद को चोट भी पहुंचा लेते थे.
ग्वालियर से निकलकर पीयूष मिश्रा ने दिल्ली का रुख किया और साल 1986 में प्रतिष्ठित राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) से ग्रेजुएशन पूरा किया. इसके बाद उन्होंने करीब दो दशकों तक दिल्ली में ही रहकर थिएटर और नाटकों में अपना योगदान दिया. इस लंबे संघर्षपूर्ण दौर में उनके जीवन में कई कठिन पड़ाव आए. एक समय ऐसा भी आया जब वे शराब की बुरी लत का शिकार हो गए थे, जिससे उनके निजी जीवन और दोस्तों के साथ संबंधों पर भी गहरा असर पड़ा था. तमाम उतार-चढ़ावों का सामना करने के बाद उन्होंने अपनी इस कमजोरी पर काबू पाया और आगे बढ़े.
थिएटर में लंबा वक्त बिताने के बाद, साल 2002 में उन्होंने मुंबई का रुख किया. साल 2003 में आई फिल्म 'मकबूल' से उन्होंने अपने आधिकारिक फिल्मी सफर की शानदार शुरुआत की. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा.
गीत और संगीत: उन्होंने 'गुलाल' फिल्म का आइकॉनिक गाना "आरंभ है प्रचंड" और लोकप्रिय गीत "हुस्ना" लिखकर व गाकर इतिहास रच दिया.
अभिनय और संवाद लेखन: 'गुलाल', 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' और 'मकबूल' जैसी फिल्मों में उनके दमदार अभिनय, बेहतरीन डायलॉग्स और शानदार गानों ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया.
आज पीयूष मिश्रा सिर्फ एक अभिनेता या गायक नहीं, बल्कि एक ऐसे कलाकार हैं जो सामाजिक और छात्र हितों के मुद्दों पर मुखर होकर अपनी बात रखते हैं. झारखंड के छात्रों के बीच उनकी मौजूदगी ने इस आंदोलन को एक नई चर्चा और राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित करने का काम किया है.