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कौन है वो पहला इंडियन, जो दीपिका पादुकोण से पहले, पहुंचा हॉलीवुड वॉक ऑफ फेम ?

1930 और 40 के दशक में ब्रिटेन और अमेरिका में टीन सेंसेशन रहे साबू, एक ऐसे एक्टर रह चुके हैं जो दीपिका पादुकोण से 65 साल पहले हॉलीवुड वॉक ऑफ फेम पर पहुंच कर एक देश के रूप में भारत को गर्व करने का मौका दे चुके हैं.

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कौन है वो पहला इंडियन, जो दीपिका पादुकोण से पहले, पहुंचा हॉलीवुड वॉक ऑफ फेम ?
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बुधवार शाम को हॉलीवुड चैंबर ऑफ कॉमर्स के चयन पैनल ने प्रतिष्ठित वॉक ऑफ फेम में 2025 के शामिल होने वालों की घोषणा की. इनमें से प्रत्येक सेलिब्रिटी को प्रतिष्ठित हॉलीवुड वॉक ऑफ फेम पर एक स्टार मिलेगा. इस सूची में भारतीय अभिनेत्री दीपिका पादुकोण भी शामिल हैं, जिन्हें वेस्ट में XXX: द रिटर्न ऑफ जेंडर केज में अभिनय के लिए जाना जाता है.

दीपिका के इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल होने की कई लोगों ने सराहना की, जबकि कुछ ने गलती से उन्हें यह सम्मान पाने वाली पहली भारतीय बताया. हालांकि, ऐसा बिलकुल नहीं है. इस सिलसिले की शुरुआत काफी पहले हो चुकी है. 

हॉलीवुड वॉक ऑफ फेम में पहला भारतीय

1960 में, हॉलीवुड वॉक ऑफ फेम की श्रेणी में पहली और एकमात्र बार, 2025 से पहले, एक भारतीय नाम शामिल किया गया था. यह नाम था साबू दस्तगीर का, जो भारत में भले ही काफी हद तक अनजान हो, लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध से पहले हॉलीवुड में इस नाम को लेकर चर्चाओं का बाजार हमेशा गर्म रहा करता था.

1924 में मैसूर में एक हाथी महावत के घर जन्मे साबू को अमेरिकी फिल्म निर्माता रॉबर्ट फ्लेहर्टी ने रुडयार्ड किपलिंग की किताब पर आधारित अपनी 1937 की फिल्म, एलीफेंट बॉय के लिए चुना था. 1938 में, साबू फिल्म, द ड्रम के साथ हॉलीवुड चले गए. 1940 में, वे हॉलीवुड में स्टार बन गए जब उन्होंने फैंटेसी एडवेंचर फिल्म द थीफ ऑफ बगदाद में अबू की भूमिका निभाई.

अगले कुछ वर्षों में, साबू मोगली, अरेबियन नाइट्स, व्हाइट सैवेज और कोबरा वूमन जैसी हिट फिल्मों में दिखाई दिए. किशोरावस्था में, साबू हॉलीवुड के सबसे लोकप्रिय गैर-श्वेत अभिनेताओं में से एक थे, जो उस युग की कुछ सबसे बड़ी फैंटेसी और एक्शन फिल्मों में दिखाई दिए.

1944 में अमेरिकी नागरिक बनने के बाद, साबू अमेरिकी सेना में शामिल हो गए और द्वितीय विश्व युद्ध में भी लड़े. लेकिन यह उनके करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ. युद्ध के बाद भूमिकाएं कम हो गईं. 50 के दशक में, साबू ज्यादातर असफल यूरोपीय फिल्मों में दिखाई दिए.

'1957 में, उन्हें मदर इंडिया में मुख्य भूमिका के लिए महबूब खान ने चुना था, लेकिन साबू इसके लिए आवश्यक वर्क परमिट हासिल नहीं कर पाए. अंततः यह भूमिका सुनील दत्त को मिल गई. साबू ने कभी किसी भारतीय फिल्म में काम नहीं किया. 1963 में दिल का दौरा पड़ने से उनकी मृत्यु हो गई, तब उनकी उम्र सिर्फ़ 39 वर्ष थी.

कैसे भविष्य के भारतीय सितारों के लिए मार्ग प्रशस्त कर गए साबू 

साबू पश्चिम में बड़ी सफलता पाने वाले पहले भारतीय थे. द थीफ ऑफ बगदाद और रैम्पेज जैसी हिट फिल्मों में उनकी भूमिका ने उन्हें हॉलीवुड में एक जाना-पहचाना चेहरा बना दिया. उनकी मृत्यु के कई सालों बाद, कबीर बेदी, ओम पुरी और अमरीश पुरी जैसे भारतीय अभिनेता हॉलीवुड फिल्मों में कभी-कभार नज़र आते थे.

यहां तक कि नसीरुद्दीन शाह और अनुपम खेर भी अमेरिकी फिल्मों में नज़र आए, लेकिन उनमें से कोई भी मुख्य भूमिका में नहीं था. ऐश्वर्या राय और बाद में प्रियंका चोपड़ा के बड़ी क्रॉसओवर फिल्मों में अभिनय करने के बाद ही भारतीय एक बार फिर हॉलीवुड में मुख्य भूमिका में आए. इस बीच, इरफ़ान खान ने पश्चिम में एक शानदार करियर बनाया, जिसमें वे प्रमुख हॉलीवुड फिल्मों में नायक और सहायक किरदार दोनों के रूप में नज़र आए.

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