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अरशद वारसी की जीवन या भीमा कॉन में पहली बार डबल रोल देखने को मिलता है. फिल्म इंश्योरेंस कं, गलत पहचान, धोखे और डायमंड स्मगलिंग को कॉमेडी के साथ जोड़ती है. मजबूत कलाकारों के बावजूद स्क्रीनप्ले कई जगह उलझता है.
फिल्म: जीवन या भीमा कॉन?
मुख्य कलाकार: अरशद वारसी, संजीदा शेख, विजय राज, पूजा चोपड़ा, बृजेंद्र काला
निर्देशक: अभिषेक डोगरा
रिलीज की तारीख: 4 सितंबर 2026
कहां देखें: सिनेमाघर
रेटिंग: 3.5 स्टार्स
कर्ज का बोझ इंसान को ऐसा फैसला लेने पर मजबूर कर सकता है, जिसकी कीमत बाद में बहुत भारी पड़ जाए. अरशद वारसी की फिल्म जीवन या भीमा कॉन भी इसी सोच को एक अजीबोगरीब क्राइम कॉमेडी में बदलती है. यहां एक परेशान आदमी अपनी जिंदगी बदलने के लिए जो प्लान बनाता है, वही धीरे-धीरे उसके लिए मुसीबतों का जाल बन जाता है.
फिल्म 4 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है. अभिषेक डोगरा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में अरशद वारसी, संजीदा शेख, विजय राज, पूजा चोपड़ा और बृजेंद्र काला अहम भूमिकाओं में हैं. फिल्म की खास बात यह है कि अरशद वारसी पहली बार डबल रोल में नजर आ रहे हैं.
रिलीज से पहले फिल्म के नाम में भी बड़ा बदलाव हुआ. इसे पहले जीवन बीमा योजना के नाम से प्रमोट किया जा रहा था, लेकिन रिलीज से कुछ दिन पहले इसका नाम बदलकर जीवन या भीमा कॉन कर दिया गया. मनीकंट्रोल के मुताबिक फिल्म का आधिकारिक नाम जीवन या भीमा कॉन है और यह 4 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई. ([Moneycontrol][1])
नाम में बदलाव सिर्फ टाइटल बदलने तक सीमित नहीं है. नया नाम फिल्म की कहानी में मौजूद जीवन, भीमा और कॉन के खेल की तरफ भी इशारा करता है. बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म का नाम पहले जीवन भीमा योजना था और बाद में बदला गया. रिपोर्ट में नाम बदलने के पीछे सीबीएफसी के निर्देश का भी जिक्र है, क्योंकि पुराना नाम प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना से मिलता-जुलता माना गया था.
फिल्म की कहानी जीवन के इर्द-गिर्द घूमती है, जो कर्ज से परेशान है और अपनी आर्थिक मुश्किलों से निकलने का रास्ता खोज रहा है. वह ऐसा प्लान बनाता है जो कागज पर आसान दिखाई देता है, लेकिन हालात बिगड़ते ही एक झूठ दूसरे झूठ को जन्म देने लगता है.
कहानी में इंश्योरेंस कं, गलत पहचान, धोखा और डायमंड स्मगलिंग जैसे एलिमेंट एक-दूसरे से जुड़ते जाते हैं. टीओआई के रिव्यू के मुताबिक फिल्म में जीवन और उसकी पत्नी योजना फर्जी मौत की योजना बनाते हैं और उसके बाद डुप्लीकेट पहचान से जुड़ी परिस्थितियां पैदा होती हैं. टीओआई ने फिल्म को 1 घंटे 55 मिनट की हिंदी कॉमेडी, क्राइम और थ्रिलर फिल्म बताया है.
आम दर्शक के लिए इसका मतलब साफ है. फिल्म सीधे तौर पर यह दिखाती है कि जल्दी पैसा पाने या किसी मुश्किल से निकलने के लिए बनाया गया गलत प्लान किस तरह नई परेशानियों को जन्म दे सकता है. हालांकि फिल्म इसे गंभीर सामाजिक संदेश की तरह नहीं, बल्कि हास्य और कंफ्यूजन के जरिए पेश करती है.
फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण अरशद वारसी के दो किरदार हैं. वह जीवन और भीमा की भूमिका निभाते हैं. जीवन एक परेशान और डरा हुआ आम आदमी है, जबकि भीमा की एंट्री कहानी के समीकरण ही बदल देती है.
यहां सिर्फ दो अलग चेहरे दिखाना काफी नहीं था. दोनों किरदारों के हावभाव, बोलने के अंदाज और परिस्थितियों पर प्रतिक्रिया में फर्क रखना जरूरी था. फिल्मफेयर ने भी फिल्म को गलत पहचान पर आधारित कॉमेडी थ्रिलर बताया है और अरशद वारसी के डबल रोल को इसकी प्रमुख खासियत माना है. फिल्मफेयर ने इसे 3 स्टार की रेटिंग दी है.
अरशद की कॉमिक टाइमिंग फिल्म को कई जगह संभालती है. जब कहानी जरूरत से ज्यादा उलझने लगती है, तब उनके किरदारों के बीच का फर्क और उनकी प्रतिक्रिया कुछ दृश्यों में मनोरंजन बनाए रखती है.
संजीदा शेख योजना के किरदार में सिर्फ जीवन की पत्नी बनकर नहीं रह जातीं. उनका किरदार कई मौकों पर परिस्थिति को समझने और संभालने की कोशिश करता दिखाई देता है. अरशद वारसी के साथ उनकी केमिस्ट्री भी फिल्म के जरूरी हिस्सों में से एक है.
विजय राज फिल्म में विनायक की भूमिका निभाते हैं. उनका रहस्यमयी और कुछ हद तक अजीब अंदाज कहानी में अलग रंग जोड़ता है. बृजेंद्र काला और पूजा चोपड़ा भी अहम भूमिकाओं में हैं. मनीकंट्रोल ने भी विजय राज को विनायक और संजीदा शेख को योजना के रूप में दर्ज किया है. यानी कलाकारों की लिस्ट कमजोर नहीं है. असली सवाल यह है कि क्या कहानी इन कलाकारों की क्षमता का पूरा इस्तेमाल कर पाती है.
यहां थोड़ा सावधान रहना जरूरी है. फिल्म को हल्की क्राइम कॉमेडी समझकर देखने जा रहे दर्शकों को इसमें कॉमेडी का एक अलग अंदाज देखने को मिल सकता है, लेकिन समीक्षाओं में इसके कुछ एडल्ट और टॉयलेट ह्यूमर वाले हिस्सों का भी जिक्र किया गया है.
रेडिफ ने फिल्म के हास्य को लेकर काफी आलोचनात्मक रुख अपनाया और कहा कि अरशद वारसी, विजय राज और बृजेंद्र काला जैसे कलाकारों की कॉमिक क्षमता का पूरा फायदा नहीं उठाया गया. इसलिए अगर आपका सवाल है कि क्या इसे पूरे परिवार के साथ बिना सोचे देखा जा सकता है, तो जवाब थोड़ा सावधानी वाला है. दर्शकों को फिल्म की कॉमेडी की प्रकृति ध्यान में रखनी चाहिए.
जीवन या भीमा कॉन की सबसे बड़ी ताकत इसका कॉन्सेप्ट और अरशद वारसी का डबल रोल है. कर्ज में फंसा आदमी, फर्जी मौत, डुप्लीकेट पहचान, इंश्योरेंस का पैसा और डायमंड स्मगलिंग जैसे एलिमेंट मिलकर कहानी को अलग बनाते हैं.
कमजोरी स्क्रीनप्ले है. जहां कहानी को और ज्यादा स्मार्ट और तेज होना चाहिए था, वहां कुछ हिस्से जरूरत से ज्यादा खिंचे हुए महसूस होते हैं. यही वजह है कि अलग-अलग समीक्षकों की राय में काफी अंतर दिखाई देता है. फिल्मफेयर ने 3 स्टार, टीओआई ने 2.5 स्टार और आउटलुक ने 1.5 स्टार दिए हैं. इस रिव्यू के हिसाब से रेटिंग 3.5 स्टार्स है.
अगर आपको अरशद वारसी की कॉमेडी पसंद है और गलत पहचान, कंफ्यूजन तथा क्राइम के साथ बनी हल्की-फुल्की कहानियां देखना पसंद करते हैं, तो जीवन या भीमा कॉन एक बार देखी जा सकती है. फिल्म कोई बेहद टाइट क्राइम थ्रिलर बनने की कोशिश नहीं करती, बल्कि अपने अजीब हालात और किरदारों से मनोरंजन पैदा करने की कोशिश करती है.
लेकिन अगर आप हर ट्विस्ट के पीछे मजबूत लॉजिक और लगातार तेज स्क्रीनप्ले चाहते हैं, तो फिल्म कुछ जगह निराश कर सकती है. खासकर दूसरे हिस्से में कहानी का कंफ्यूजन कभी-कभी मनोरंजन से ज्यादा बोझिल लगने लगता है.
कुल मिलाकर, जीवन या भीमा कॉन का असली आकर्षण अरशद वारसी का डबल रोल है. फिल्म का आइडिया दिलचस्प है, कलाकार मजबूत हैं और कुछ कॉमिक मोमेंट्स असर छोड़ते हैं, लेकिन स्क्रीनप्ले अगर ज्यादा टाइट होता तो यह कॉमेडी और क्राइम का बेहतर संतुलन बना सकती थी.
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