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IFFM 2026: कब और क्यों दी जाती है ‘ऑनररी डॉक्टर ऑफ लेटर्स’ की उपाधि? जिसे 3 दशक बाद पाकर रानी मुखर्जी हुईं भावुक

IFFM 2026 में रानी मुखर्जी को 'ऑनररी डॉक्टर ऑफ लेटर्स' से सम्मानित किया गया. भारतीय सिनेमा में उनके 3 दशकों के शानदार योगदान और इस ऐतिहासिक उपलब्धि से जुड़ी पूरी जानकारी आपको इसी लेख में मिल जाएगी.

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IFFM 2026: कब और क्यों दी जाती है ‘ऑनररी डॉक्टर ऑफ लेटर्स’ की उपाधि? जिसे 3 दशक बाद पाकर रानी मुखर्जी हुईं भावुक

Image Credit: AI

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सिनेमा जगत में अपने बेमिसाल अभिनय और मजबूत किरदारों से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाली बॉलीवुड की लोकप्रिय अभिनेत्री रानी मुखर्जी के नाम एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है. मेलबर्न में आयोजित प्रतिष्ठित इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न (IFFM 2026) के दौरान उन्हें ला ट्रोब यूनिवर्सिटी द्वारा ‘ऑनररी डॉक्टर ऑफ लेटर्स’ की उपाधि से नवाजा गया. अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिले इस बड़े सम्मान को पाकर रानी मुखर्जी बेहद भावुक नजर आईं. आइए जानते हैं कि यह खास उपाधि कब-क्यों और किसे दी जाती है, और रानी मुखर्जी के लिए यह पल क्यों इतना खास रहा.

'ऑनररी डॉक्टर ऑफ लेटर्स' क्या है और क्यों दी जाती है?

शैक्षणिक और सांस्कृतिक जगत में 'डॉक्टर ऑफ लेटर्स' (Doctor of Letters) एक बेहद प्रतिष्ठित मानद उपाधि होती है. यह किसी यूनिवर्सिटी द्वारा दिया जाने वाला एक ऐसा सर्वोच्च सम्मान है जो व्यक्ति की अकादमिक डिग्री के बजाय उसके जीवनभर के उल्लेखनीय कार्यों, सामाजिक प्रभाव और रचनात्मक उत्कृष्टता को मान्यता देता है. ला ट्रोब यूनिवर्सिटी द्वारा रानी मुखर्जी को यह सम्मान भारतीय सिनेमा में उनके तीन दशकों के शानदार सफर और कला के प्रति समर्पण के लिए दिया गया है.

किसे मिलती है यह उपाधि?

'डॉक्टर ऑफ लेटर्स' की उपाधि आम तौर पर उन असाधारण शख्सियतों को दी जाती है जिन्होंने कला, साहित्य, संस्कृति, सिनेमा या समाज सेवा के क्षेत्र में अपने विशिष्ट और दीर्घकालिक योगदान से दुनिया पर गहरी छाप छोड़ी हो. आईएफएफएम 2026 का यह भव्य आयोजन 13 अगस्त से शुरू होकर 23 अगस्त तक चल रहा है, जहां रानी मुखर्जी की इस बड़ी जीत ने एक बार फिर पूरी दुनिया में भारतीय सिनेमा और महिला कलाकारों का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है.

रानी मुखर्जी की भावुक प्रतिक्रिया

ऑस्ट्रेलिया की धरती पर मिले इस प्यार से अभिभूत होकर रानी मुखर्जी ने अपने शुरुआती दिनों को याद किया. उन्होंने बताया कि जब उन्होंने इंडस्ट्री में कदम रखा था, तब उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनके किरदार सात समंदर पार बैठे लोगों के दिलों को भी इस तरह छू लेंगे. रानी ने कहा कि मानवीय भावनाओं और कहानियों को किसी पासपोर्ट या वीजा की जरूरत नहीं होती, क्योंकि कला सीमाओं से परे दिलों को आपस में जोड़ती है.

रानी मुखर्जी को क्यों मिला  'डॉक्टर ऑफ लेटर्स'?

रानी मुखर्जी ने तीन दशकों के लंबे करियर में 'ब्लैक', 'हम तुम', 'युवा', 'मर्दानी' और 'मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे' जैसी यादगार फिल्में दी हैं. उन्होंने हमेशा स्क्रीन पर ऐसी मजबूत महिलाओं के किरदार निभाए हैं, जो निडर थीं और अपने हक के लिए लड़ती दिखाई दीं. रानी मुखर्जी के इसी योगदान ने उन्हें 'डॉक्टर ऑफ लेटर्स' का सम्मान दिलाया. अवार्ड पाकर अभिनेत्री ने साझा किया कि इन तमाम चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं ने उन्हें न केवल एक मंझा हुआ कलाकार बनाया, बल्कि उन्हें जिंदगी में एक बेहतर इंसान बनने में भी बहुत मदद की है.

 

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