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इमरान हाशमी की फिल्म 'आवारापन 2' सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है. 19 साल बाद लौटे शिवम पंडित की इस कहानी में जबरदस्त इमोशन, दमदार एक्शन और शानदार अभिनय का बेहतरीन मेल देखने को मिल रहा है.
फिल्म: आवारापन 2
कलाकार: इमरान हाशमी, दिशा पाटनी, शबाना आज़मी, पूरन गब्बी, सुविंदर विक्की और विजयंत कोहली
निर्देशक: नितिन कक्कड़
रिलीज़ डेट: 14 अगस्त 2026
रनटाइम: 140 मिनट
रेटिंग: 4 स्टार्स
कहां देखें: सिनेमाघर
क्या आपने कभी सोचा है कि दो दशक पहले छोड़ा गया कोई अधूरा रिश्ता अचानक लौट आए तो दिल पर क्या गुजरती है? साल 2007 में आई उस कल्ट फिल्म के बाद अब सिनेमाघरों में 'आवारापन 2' ने दस्तक दे दी है. एक रिव्यू के नजरिए से देखें तो यह फिल्म सिर्फ एक सीक्वल नहीं है, बल्कि उस खोए हुए जज्बात की मु मुकम्मल दास्तान है जिसके लिए दर्शक आज भी सिनेमाघरों की तरफ खिंचे चले आ रहे हैं. क्या यह फिल्म उम्मीदों के उन पैमानों पर खरी उतरती है जो इसके पहले पार्ट ने सेट किए थे? आइए इस पर विस्तार से नजर डालते हैं.
फिल्म की कहानी वहीं से नया मोड़ लेती है जहां पुराना जख्म हरा हो जाता है. शिवम पंडित आज भी अपनी आलिया की यादों के साये में जी रहा है, लेकिन किस्मत उसे एक ऐसी परीक्षा में डाल देती है जहां उसे खुद को फिर से दांव पर लगाना पड़ता है. एक अनाथ बच्ची की खातिर उसका मानव तस्करी के उस काले दलदल में उतर जाना कहानी को एक रोमांचक मोड़ देता है. क्रिटिकली बात करें तो, फिल्म का पहला हिस्सा थोड़ा सुस्त लग सकता है, लेकिन जैसे ही एक्शन शुरू होता है, स्क्रीनप्ले पूरी तरह से दर्शकों को बांध लेता है.
परफॉर्मेंस के मामले में इस फिल्म ने चौंकाने का काम किया है. लंबे बिखरे बालों और आंखों में अथाह दर्द लिए इमरान हाशमी ने साबित कर दिया है कि इंटेंस किरदार निभाने में उनका कोई मुकाबला नहीं है. उनके सिक्स-पैक एब्स और सीटी-मार अंदाज ने युवाओं में एक अलग ही जोश भर दिया है. दूसरी तरफ, शबाना आज़मी की सधी हुई अदाकारी और पूरन गब्बी की खौफनाक स्क्रीन प्रेजेंस ने विलेन के किरदारों में एक नया खौफ पैदा किया है. सबसे बड़ा सरप्राइज दिशा पाटनी का वह रूप है, जिसने आलोचकों का मुंह हमेशा के लिए बंद कर दिया है.
नितिन कक्कड़ का निर्देशन इस बार बेहद कसा हुआ और जमीन से जुड़ा हुआ है. फिल्म के डायलॉग्स सीधे दिल पर जाकर लगते हैं. इसके गानों की लोकप्रियता पहले ही सोशल मीडिया पर तहलका मचा रही है और जब वे पर्दे पर पृष्ठभूमि के साथ बजते हैं, तो माहौल पूरी तरह बदल जाता है. हालांकि, तकनीकी पक्ष को देखें तो सेकंड हाफ की एडिटिंग अगर थोड़ी और तेज होती, तो रोमांच का ग्राफ और भी ऊपर जा सकता था, लेकिन इसके बावजूद सिनेमाई अनुभव में कोई कमी नहीं खलती.
एक रिव्यू के तौर पर निष्कर्ष यह निकलता है कि यह फिल्म पैसा वसूल तो है ही, साथ ही यह इस बात का अहसास कराती है कि सिनेमा सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि भावनाओं का आईना है. परिवार के साथ थिएटर जाने वालों के लिए यह एक परफेक्ट वीकेंड पैकेज है, जहां पुराना नॉस्टेल्जिया नए जमाने के एक्शन से मिलता है. अगर आप सिनेमाई दुनिया में कुछ ऐसा देखना चाहते हैं जो दिमाग के साथ-साथ दिल को भी झकझोर दे, तो यह फिल्म आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है.
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