Advertisement
हिंदी न्यूज़एंटरटेनमेंट

कोलकाता का मजदूर कैसे बना यूएई का अरबपति, आरकेजी मूवीज की बायोग्राफिकल ड्रामा हौसले कर देगी बुलंद

कोलकाता की गलियों से उठकर संयुक्त अरब अमीरात के सबसे सम्मानित अरबपतियों में से एक और बन चुके डॉ. राजेश के अग्रवाल की बायोग्राफिकल ड्रामा 'विजेता' जीरो से हीरो बनने की कहानी है.

Latest News
कोलकाता का मजदूर कैसे बना यूएई का अरबपति, आरकेजी मूवीज की बायोग्राफिकल ड्रामा हौसले कर देगी बुलंद

कोलकाता का मजदूर कैसे बना यूएई का अरबपति

Add DNA as a Preferred Source

अगर आप रियल लाइफ चैलेंजेस फेस करने वाले सक्सेसफुल लोगों की रियल सफर को देखना पसंद करते हैं तो 'विजेता मूवी आपके लिए ही बनी है. क्योंकि इसमें कोलकाता की गलियों से अरब तक पहुंचे ऐसे व्यापारी की कहानी है जिसे हर कदम पर नए चैलेंज मिले और जान का खतरा भी रहा है. 

ये फिल्म एक फर्श से अर्श पर पहुंचे ऐसे व्यक्ति की केवल व्यक्तिगत जीत की कहानी नहीं है, बल्कि एक व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता, अंडरवर्ल्ड के खतरों और व्यक्तिगत नुकसान की चुनौतियों से लड़ते हुए दुनिया में छाने की है. 

डॉ. राजेश के अग्रवाल की ये बायोपिक विजेता का आधिकारिक पोस्टर जारी हो चुका है और पोस्टर देखकर ही आप डॉ. राजेश के अग्रवाल की असाधारण यात्रा की झलक देख सकते हैं कि कैसे एक व्यक्ति कोलकाता की गलियों से संयुक्त अरब अमीरात के अरबपतियों में शुमार हुआ और  स्थिरता के लिए एक वैश्विक आवाज बन गया.

राजीव एस रुइया द्वारा निर्देशित और डॉ. राजेश के अग्रवाल द्वारा आरकेजी मूवीज़ के बैनर तले निर्मित, "विजेता" एक भावनात्मक, सशक्त और प्रेरणादायक कहानी है. संदीप नाथ द्वारा लिखित इस फिल्म में रवि भाटिया, ज्ञान प्रकाश, भारती अवस्थी, दीक्षा ठाकुर, गूडन कुमार, प्रिटी अग्रवाल और अन्य कलाकार हैं.

विजेता 19 सितंबर 2025 को रिलीज होने वाली है, जो यथार्थवाद, आशा और भावनात्मक गहराई के मिश्रण होगी. पोस्टर में फिल्म के मुख्य विषय - "जीरो टू हीरो: ए रियल लाइफ जर्नी" को दर्शाया गया है, जिसमें नायक को समर्थकों के समुद्र के ऊपर उड़ते हुए दिखाया गया है, जो प्रतिकूल परिस्थितियों पर विजय का प्रतीक है.

डॉ. राजेश के अग्रवाल कोलकाता के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे और जिन्होंने किशोरावस्था में ही मज़दूरी शुरू कर दी थी ताकि अपने पिता, जो ऊनी और होज़री के सामान के एजेंट थे, सात लोगों के परिवार का भरण-पोषण कर सकें. 1970 के दशक के उत्तरार्ध में नायलॉन के अंडरवियर की पैकेजिंग से लेकर एक फलते-फूलते परिधान व्यवसाय को खड़ा करने तक उनके संघर्ष को बयां करती ये फिल्म उन लोगों के लिए किसी अंधेरे में उजाले की एक किरण जैसी है जो अपना सब कुछ हार के बैठ गए हैं.  

डॉ. राजेश के अग्रवाल ने अपने कपड़े के बिजनेस तक ही सीमित नहीं रखा बल्कि वो मेटल रिसाइकिलिंग से लेकर आरकेजी इंटरनेशनल एफज़ेडसी की स्थापना तक ले कर गए. उनकी कंपनी दुनिया के 33 देशों में है.  अंतर्राष्ट्रीय पुनर्चक्रण ब्यूरो (बीएमआर) के बोर्ड सदस्य और अंतर्राष्ट्रीय पुनर्चक्रण ब्यूरो (बीआईआर) के राजदूत के रूप में वे वैश्विक स्थिरता नीतियों को प्रभावित करते हैं.

निर्देशक राजीव एस रुइया के अनुसार "विजेता सिर्फ़ आर्थिक सफलता की कहानी नहीं है, यह लचीलेपन, नैतिकता और सभी बाधाओं से ऊपर उठने की इच्छाशक्ति की कहानी है. डॉ. अग्रवाल का सफ़र ऐसा है जिसे दुनिया को देखना चाहिए. 

देश-दुनिया की ताज़ा खबरों Latest News पर अलग नज़रिया, अब हिंदी में Hindi News पढ़ने के लिए फ़ॉलो करें डीएनए हिंदी को गूगल, फ़ेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम पर.

Read More
Advertisement
Advertisement
Advertisement