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बप्पी दा की जिंदगी में संगीत की शुरुआत चार साल की उम्र में हो गई थी, जब उन्होंने कोलकाता के ईडन गार्डन में तबला बजाकर लोगों का दिल जीत लिया था.
डीएनए हिंदी: बुधवार की सुबह मशहूर सिंगर बप्पी लहरी के निधन की खबर लेकर आई. 70 साल के बप्पी लहरी काफी समय से बीमार थे. सोमवार को ही उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज मिला था. मंगलवार को फिर हालत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था. मंगलवार रात ही उनका निधन हो गया था. 27 नवम्बर 1952 कोलकत्ता में जन्में बप्पी लहरी ने अपने अलग अंदाज की वजह से फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई थी.
छोटी सी उम्र से संगीत की शुरुआत
बप्पी दा की जिंदगी में संगीत की शुरुआत बहुत छोटी सी उम्र से हो गई थी. चार साल की उम्र में उन्होंने कोलकाता के ईडन गार्डन में आयोजित तबला कॉन्सर्ट के दौरान तबला बजाकर लोगों का दिल जीत लिया था. हालांकि बप्पी लहरी का सफर म्यूजिक इंडस्ट्री में उनके मामा जी की वजह से शुरू हुआ था.
मामा किशोर कुमार लाए संगीत की दुनिया में
कम ही लोग जानते हैं कि सुप्रसिद्ध सिंगर और कंपजोर किशोर कुमार बप्पी लहरी के मामा लगते हैं. किशोर कुमार के मार्गदर्शन में ही बप्पी लहरी ने म्यूजिक इंडस्ट्री में कदम रखा था. इसके बाद उन्हें मुड़कर नहीं देखना पड़ा और वो अपने काम से लोगों का दिल जीतते चले गए. सन् 1975 में आई फिल्म जख्मी के गानों के जरिए संगीत प्रेमियों ने बप्पी दा को नोटिस किया. इसके बाद चलते-चलते, पापी और आप की खातिर जैसी फिल्मों के संगीत से भी बप्पी दा चर्चा में आए.
एक साल में 180 गानों का रिकॉर्ड
बप्पी लहरी ने 1983 से 1985 तक आई 12 सिल्वर जुबली फिल्मों के लिए गाने गाकर रिकॉर्ड बनाए. सन् 1986 में बप्पी लहरी का नाम एक ही साल में 33 फिल्मों में 180 से ज्यादा गाने रिकॉर्ड करने के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज हुआ था.
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