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अनुपम खेर ने आतंकवाद के शिकार के रूप में अपना व्यक्तिगत दर्द साझा किया और कश्मीरी पंडितों की दुर्दशा पर विचार किया. उन्होंने भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर की सराहना की और आतंकवाद से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए मजबूत नेतृत्व का आग्रह किया.
बॉलीवुड एक्टर अनुपम खेर का शुमार उन लोगों में है जो आतंकवाद जैसे मसले पर मुखर होकर अपनी बातें रखते हैं. एक बार फिर अनुपम खेर ने आतंकवाद के विषय पर बात की है और उन्होंने खुद को और अपने परिवार को पीड़ित बताया. कश्मीरी पंडितों की दुर्दशा को याद करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे 19 जनवरी, 1990 की रात को उन्हें अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा.
बता दें कि एक चैनल से हुई एक बेहद खास बातचीत में अभिनेता-निर्देशक ने न केवल नरेंद्र मोदी सरकार के ऑपरेशन सिंदूर की सराहना की, बल्कि उस दर्द को भी याद किया जिसे आतंकवाद के चलते उन्होंने और उनके परिवार ने झेला.
खेर ने अपनी असहायता के बजाय गुस्से की भावना व्यक्त की, खासकर 22 अप्रैल को पहलगाम हमले के दौरान अपने मृत पति के बगल में बैठी एक महिला जैसे दुखद दृश्य देखने के बाद, उन्होंने कहा कि इन दुखद चित्रों को देखकर उनमें भी किसी भी आम भारतीय की तरह गुस्सा पैदा हुआ.
खेर ने कहा कि, 'मैं आतंकवाद का शिकार हूं. मेरा परिवार आतंकवाद का शिकार है. 32 साल तक कश्मीरी पंडितों को कुछ नहीं हुआ, जिन्हें 19 जनवरी, 1990 की एक रात अपने घर छोड़ने पड़े. और फिर, अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद ऐसा कुछ [पहलगाम की घटना का जिक्र करते हुए] हो रहा है.
उन्होंने कहा कि बहुत सारे लोग वहां [कश्मीर] जा रहे हैं. मैंने खुद को असहाय महसूस करना बंद कर दिया है. मुझे गुस्सा आता है क्योंकि जब मैं अपने मृत पति के बगल में बैठी एक महिला की तस्वीर देखता हूं, तो मुझे किसी भी आम भारतीय की तरह गुस्सा आता है.'
पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू करके सरकार की जवाबी कार्रवाई की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, 'आप अपनी सरकार या अपने नेतृत्व से कार्रवाई की उम्मीद करते हैं और जब उन्होंने ऐसा किया, तो मुझे लगा कि मैं सही साबित हुआ हूं. मुझे नहीं पता कि यह सही शब्द है या नहीं, लेकिन मुझे लगा कि ऐसा ही होना चाहिए था. दो दिनों के भीतर, हमें पता चल गया कि वहां क्या हुआ. लोगों के अपने-अपने सिद्धांत हैं, लेकिन अब हमें तथ्य पता चल रहे हैं और पता चल रहा है कि हमारा हमला कितना सटीक था.'
खेर ने पाकिस्तान में नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले के लिए भारतीय सशस्त्र बलों की भी सराहना की. उन्होंने कहा कि, 'हमारी सेनाएं कितनी शानदार हैं, खुफिया तंत्र ने कैसे काम किया. नेतृत्व ही निर्णय लेता है. दुर्भाग्य से, जब मुंबई में 26/11 हुआ, तो नेतृत्व ने इस बारे में कुछ नहीं किया और यह दुर्भाग्यपूर्ण था. अब हम जानते हैं कि हमारे पास ऐसे लोग हैं जो चीजों को हल्के में नहीं लेंगे.'