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90s में अल्ताफ राजा का एक गाना ऐसा आया कि लाखों लोगों को अपना दीवाना बना दिया. उनका यह गाना छोटे-छोटे शहरों से लेकर महानगरों तक खूब पॉपुलर हुआ. उस दौर में सॉन्ग के कैसेट और सीडी भी रिकॉर्ड तोड़ बिकी थीं.
90 के दशक में संगीत की दुनिया में कई सितारे चमके, लेकिन अल्ताफ राजा की आवाज का दर्द बिल्कुल अलग था. उनकी गायकी में एक ऐसी सादगी और अपनापन था जिसने छोटे शहरों से लेकर महानगरों तक के लोगों को अपना दीवाना बना लिया था. उस दौर में उनके गानों की कैसेट और सीडी की बिक्री ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे.
अगर उस दौर में किसी गाने ने मोहब्बत और जुदाई के दर्द को सबसे गहराई से बयां किया, तो वह था अल्ताफ राजा का कालजयी गाना. यह महज एक गाना नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों के दिलों की धड़कन बन गया जो प्यार में धोखा खा चुके थे. अल्ताफ राजा की भर्राई हुई आवाज और शायरी भरे बोल सीधे रूह को छू लेते हैं.
यह मशहूर गाना साल 2000 में आए उनके सुपरहिट एल्बम 'दिल के टुकड़े हजार हुए' का हिस्सा है. इसे अल्ताफ राजा और वैष्णव देवा के संगीत के साथ अरुण भैरव ने अपने शब्दों से पिरोया था. 4 मिनट 43 सेकंड की अवधि वाला यह गीत आज भी यूट्यूब पर वायरल होता है और नई पीढ़ी के टूटे दिलों का हमसफर बना हुआ है.
अल्ताफ राजा का सदाबहार गाना 'पहले तो कभी-कभी गम था' आज भी टूटे दिलों की आवाज है. 90 के दशक का यह दर्दभरा ट्रैक आज भी उतनी ही शिद्दत से सुना जाता है.
इस गाने की सबसे बड़ी खासियत इसकी सादगी है. 90 के दशक में जब दर्द भरे गानों का दौर चरम पर था, तब इस गाने ने श्रोताओं की जुबान पर अपनी ऐसी छाप छोड़ी कि आज दशकों बाद भी यह उतना ही ताजा लगता है. अल्ताफ राजा ने अपने करियर में कई हिट गाने दिए, लेकिन 'पहले तो कभी-कभी गम था' आज भी संगीत प्रेमियों की प्लेलिस्ट में सबसे ऊपर बना हुआ है. उनकी गायकी में शायरी और भावनाओं का जो संगम है, वह आज भी संगीत प्रेमियों को भावुक कर देने के लिए काफी है.
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