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Pragya Bharti | Apr 16, 2026, 10:28 AM IST
1.Singer Success Story

15 अप्रैल 1922 को जयपुर में जन्मे सिंगर ने अपने जीवन में काफी कुछ झेला है. उन्होंने फुटपाथ पर रातें गुजारी, बस की टिकटें तक काटी, 11 रुपये की सैलरी वाली नौकरी भी की. तब जाकर आज म्यूजिक इंडस्ट्री में उनका इतना बड़ा नाम है. यह गायक रूमानी गीतों के लिए मशहू थे. ये सिंगर अबतक करीब 2000 कल्ट गाने बना चुके हैं. चलिए इस दिग्गज गायक के बारे में आगे विस्तार से जानते हैं.
2.फुटपाथ पर गुजारी रातें और बस की टिकटें भी काटें

साल 1940 में जब ये सिंगर मुंबई आए, तो उनके पास न काम था और न रहने का ठिकाना. कई रातें उन्होंने फुटपाथ पर भूखे रहकर बिताईं. अंततः उन्हें बस कंडक्टर की नौकरी मिली, जहां उन्हें महीने के महज 11 रुपये मिलते थे. लेकिन टिकट काटते समय भी उनके हाथ में हमेशा कलम और जेहन में कविताएं होती थीं.
3.राज कपूर और किस्मत का मोड़

एक मुशायरे में पृथ्वीराज कपूर की नजर उन पर पड़ी. उन्होंने कंडक्टर की प्रतिभा को पहचाना और अपने बेटे राज कपूर से मिलवाया. इसके बाद, फिल्म 'बरसात' (1949) के साथ उस कंडक्टर का फिल्मी सफर शुरू हो गया.'बदन पे सितारे', "जिया बेकरार है" और "छोड़ गए बालम" जैसे गानों ने उन्हें रातों-रात मशहूर कर दिया. इसके बाद राज कपूर ने उन्हें 300 रुपये की सैलरी पर रख लिया और शंकर-जयकिशन के साथ मिलकर उन्होंने संगीत का एक सुनहरा युग रचा.
4.11 रुपये से करियर शुरू करने वाले वो सिंगर कौन हैं?

दरअसल, हम बात कर रहे हैं- इकबाल हुसैन की, जिन्हें दुनिया हसरत जयपुरी के नाम से जानती है, उनके नाम में 'हसरत' शब्द उनकी एक अधूरी मोहब्बत की दास्तां बयां करता है, जिसने उन्हें शायरी की दुनिया में धकेल दिया. हसरत, साल 1940 में मुंबई आए और फिर लंबे समय तक जद्दोहत करने के बाद उन्हें राज कपूर के साथ काम करने का मौका मिला.
5.जब हकीकत बनी संगीत

इस साहब के गानों में उनकी निजी जिंदगी की झलक मिलती थी. फिल्म 'संगम' का मशहूर गाना "बोल राधा बोल संगम होगा कि नहीं" दरअसल उनका एक असली प्रेम पत्र था, जो उन्होंने जयपुर में अपनी प्रेमिका को लिखा था. वहीं, "बदन पे सितारे लपेटे हुए" जैसे गाने की प्रेरणा उन्हें पेरिस में एक महिला की ड्रेस देखकर मिली थी.
6.हसरत जयपुरी 2000 अधिक गाने लिखे

हसरत जयपुरी ने अपने करियर में 300 से अधिक फिल्मों के लिए 2000 से ज्यादा गाने लिखे. 'आवारा', 'श्री 420', 'जंगली', और 'सूरज' जैसी फिल्मों के गीतों ने उन्हें अमर बना दिया. यहां तक कि साल 1985 में उन्होंने राज कपूर की फिल्म 'राम तेरी गंगा मैली' के लिए "सुन साहिबा सुन" जैसा सुपरहिट गाना अपने भांजे अनु मलिक की चुनौती पर लिखकर साबित कर दिया कि उनका जादू कभी कम नहीं होगा. 17 सितंबर 1999 को इस महान गीतकार ने दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन उनके लिखे शब्द आज भी हर प्रेमी के दिल की धड़कन बनकर धड़कते हैं.
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