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Pragya Bharti | Feb 06, 2026, 12:40 PM IST
1.Untold Story of Lata Mangeshkar

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के दशकों पुराने इतिहास में कई दिग्गज आए और गए, लेकिन लता मंगेशकर का नाम उस ध्रुव तारे की तरह है जो हमेशा अपनी चमक बिखेरता रहेगा. 6 दशकों से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने न केवल संगीत की बुलंदियों को छुआ, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ऐसी धरोहर छोड़ गईं जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता.
2.हेमा से लता बनने की कहानी और शिक्षा का अनुभव

28 सितंबर 1929 को इंदौर के एक मराठी परिवार में जन्मीं इस नन्ही बच्ची का नाम पिता पंडित दीनदयाल मंगेशकर ने 'हेमा' रखा था. हालांकि, बाद में एक नाटक के पात्र से प्रेरित होकर पिता ने उनका नाम बदलकर 'लता' कर दिया. उनकी शिक्षा से जुड़ा किस्सा बड़ा भावुक है. लता दीदी महज एक दिन स्कूल गईं. वे अपनी छोटी बहन आशा भोसले को भी साथ ले गई थीं, लेकिन स्कूल के अध्यापक ने आशा जी को साथ बिठाने से मना कर दिया और फीस मांगी. इस अपमान से आहत होकर लता ने फिर कभी स्कूल न जाने का फैसला किया. हालांकि, बाद में दुनिया के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों ने उन्हें मानद उपाधियों से नवाजा.
3.इकलौती 'भारत रत्न' गायिका

लता मंगेशकर भारतीय सिनेमा की पहली महिला कलाकार हैं जिन्हें भारत रत्न और दादा साहब फाल्के पुरस्कार दोनों से सम्मानित किया गया. उनके अलावा यह गौरव केवल सत्यजीत रे को प्राप्त है. यही नहीं, 1974 में लंदन के ऐतिहासिक रॉयल अल्बर्ट हॉल में प्रस्तुति देने वाली वे पहली भारतीय गायिका बनीं.
4.मोहम्मद रफी से विवाद और 4 साल की खामोशी

संगीत की दुनिया के दो सबसे बड़े दिग्गजों—लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी—के बीच एक समय लंबी अनबन रही. विवाद का कारण रॉयल्टी थी. लता जी गानों पर रॉयल्टी चाहती थीं, जबकि रफी साहब इसके पक्ष में नहीं थे. विवाद इतना बढ़ा कि दोनों ने एक-दूसरे के साथ गाना बंद कर दिया. करीब 4 साल बाद अभिनेत्री नरगिस के प्रयासों से सुलह हुई और दोनों ने एक बार फिर मंच पर अपनी आवाज का जादू बिखेरा.
5.लता मंगेशकर को कौन दे रहा था जहर?

लता जी की बेहद करीबी पदमा सचदेव ने अपनी किताब ‘Aisa Kahan Se Lauen’ में एक चौंकाने वाला खुलासा किया था. साल 1962 में, जब लता जी महज 32 साल की थीं, उन्हें स्लो पॉइजन (धीमा जहर) दिया जा रहा था. उन्हें लगातार उल्टियां और कमजोरी महसूस होने लगी थी. हालांकि, यह कभी पता नहीं चल सका कि वह साजिश किसकी थी, लेकिन इस घटना ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया था.
6.शादी न करने का फैसला और राज सिंह डूंगरपुर की दोस्ती

लता जी के अविवाहित रहने के पीछे दो बड़ी वजहें मानी जाती हैं. एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया था कि कम उम्र में पिता के निधन के बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी उन पर थी. भाई-बहनों को व्यवस्थित करने और उन्हें संभालने में वक्त निकलता गया. वहीं, दूसरी चर्चा राजस्थान के राज सिंह डूंगरपुर के साथ उनकी अधूरी प्रेम कहानी की भी रही. राज सिंह ने अपने पिता को वचन दिया था कि वे किसी आम लड़की को राजघराने की बहू नहीं बनाएंगे. वचन निभाने के लिए उन्होंने शादी नहीं की और लता जी ने भी आजीवन कुंवारी रहकर उस दोस्ती और अपने परिवार के प्रति समर्पण को निभाया.
7.किशोर कुमार से पहली मुलाकात का दिलचस्प किस्सा

किशोर दा और लता दीदी की पहली मुलाकात एक गलतफहमी से शुरू हुई थी. लता जी जब लोकल ट्रेन से स्टूडियो जा रही थीं, तो किशोर कुमार भी उसी डिब्बे में चढ़े. वे कुर्ता-पायजामा पहने और हाथ में छड़ी लिए थे. लता जी को लगा कि कोई उनका पीछा कर रहा है. वे डरकर स्टूडियो पहुंचीं और संगीतकार खेमचंद प्रकाश से शिकायत की. तब खेमचंद जी ने हंसते हुए बताया कि वह कोई और नहीं बल्कि अशोक कुमार के भाई किशोर कुमार हैं. इसके बाद दोनों ने फिल्म 'जिद्दी' के लिए अपना पहला युगल गीत रिकॉर्ड किया.
8.लता जी की पसंदीदा फिल्में

अभिनय से अपने करियर की शुरुआत करने वाली लता जी को 'शोले', 'मधुमती' और 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' जैसी फिल्में पसंद थीं. लेकिन उनकी सबसे पसंदीदा हॉलीवुड फिल्म 'द किंग एंड आई' थी. वहीं, भारतीय फिल्मों में उन्होंने साल 1943 में आई फिल्म 'किस्मत' को 50 से ज्यादा बार देखा था.
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