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Pragya Bharti | Mar 13, 2026, 11:37 AM IST
1.Superhit Song After Rejecting 105 Musics

बॉलीवुड के इतिहास में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो समय की सीमा को पार कर अमर हो जाती हैं. ऐसी ही एक फिल्म है 1960 में रिलीज हुई 'मुगल-ए-आजम'. इस फिल्म का हर दृश्य और हर गाना एक मिसाल है, लेकिन इस फिल्म में एक ऐसी गीत है, जिसे बनाने में मेकर्स को काफी जद्दोजहद करनी पड़ी थी. आइए इस गाने के बारे में बताते है.
2.105 गानों को रिजेक्ट करने के बाद पूरी हुई थी इस सॉन्ग की तलाश

संगीतकार नौशाद अपने काम को लेकर बेहद सख्त थे. इस एक गाने के लिए उन्होंने और गीतकार शकील बदायूंनी ने रात-दिन एक कर दिए थे. बताया जाता है कि नौशाद साहब ने शकील साहब द्वारा लिखे गए 105 अंतरा और धुन के विकल्पों को सिरे से खारिज कर दिया था. अंततः 106वीं बार में गाने की पंक्तियां और धुन तैयार हुई, तब जाकर उन्हें संतुष्टि मिली.
3.16 साल का लंबा इंतजार

निर्देशक के. आसिफ के लिए 'मुगल-ए-आजम' सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि उनका जुनून थी. इस फिल्म को हकीकत में बदलने में उन्हें 16 साल का लंबा समय लगा. उन्होंने फिल्म के हर पहलू पर बारीकी से काम किया, जिसका परिणाम आज पूरी दुनिया के सामने एक 'मैग्नम ओपस' के रूप में मौजूद है.
4.सेट पर खर्च हुआ था 1 करोड़

फिल्म के इस गाने को फिल्माने के लिए मुंबई के स्टूडियो में एक भव्य 'शीश महल' तैयार किया गया था. आईएमडीबी की रिपोर्ट के अनुसार, उस दौर में इस इकलौते गाने के सेट और फिल्मांकन पर लगभग 1 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे. यह उस समय के हिसाब से एक अविश्वसनीय राशि थी, जिसने इस गाने को भारतीय सिनेमा का सबसे महंगा गीत बना दिया.
5.इस गाने को लता मंगेशकर ने दी थी अपनी आवाज

सुरों की मल्लिका लता मंगेशकर ने इस गीत को अपनी अमर आवाज दी. गाने की रिकॉर्डिंग भी बेहद दिलचस्प रही. उस समय गूंज पैदा करने के लिए आज जैसी मशीनें नहीं थीं. कहा जाता है कि नौशाद साहब ने लता जी को स्टूडियो के बाथरूम में खड़ा कर गाना गवाया था, ताकि वह कुदरती गूंज रिकॉर्ड की जा सके जो महल के वातावरण के लिए जरूरी थी.
6.मधुबाला का आइकॉनिक 'बीस्ट मोड' डांस

खूबसूरत अभिनेत्री मधुबाला ने इस गाने में अपनी पूरी आत्मा झोंक दी थी. भारी गहनों और जंजीरों के साथ 'शीश महल' में उनका वह निडर होकर नाचना और शहंशाह अकबर की आंखों में आंखें डालकर विद्रोह करना, आज भी दर्शकों के रोंगटे खड़े कर देता है. उनके चेहरे के भावों ने इस गाने को विजुअल ट्रीट बना दिया.
7.6 मिनट 16 सेकेंड का रूहानी सुकून

6 मिनट और 16 सेकेंड का यह गाना केवल एक संगीत रचना नहीं है, बल्कि प्यार की आजादी का एक घोषणापत्र है. आज 65 साल बीत जाने के बाद भी जब यह गाना बजता है, तो श्रोता इसकी गहराई और भव्यता में खो जाते हैं. यह गाना आज भी 'कल्ट क्लासिक' की श्रेणी में सबसे ऊपर आता है.
8.किस गाने को बनाने में 105 धुन हुई थीं रिजेक्ट

दरअसल, हम बात कर रहे हैं- फिल्म'मुगल-ए-आजम' के 'जब प्यार किया तो डरना क्या' गाने के बारे में, जो साबित करता है कि जब जुनून और कला का मेल होता है, तो इतिहास रचा जाता है. 105 रिजेक्शन और करोड़ों के खर्च के बाद बना यह गीत हर पीढ़ियों के लिए आज पसंदीदा सॉन्ग है.
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