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India's Got Latent के बाद OTT प्लेटफॉर्म पर सरकार की सख्ती, इस मंत्रालय ने जारी की एडवाइजरी

Samay Raina के शो Indias Got Latent के विवाद के बाद OTT के कंटेंट को लेकर सवाल उठने लगे हैं. अब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय सख्त रुख अपनाया है. जानें क्या है मामला.

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India's Got Latent के बाद OTT प्लेटफॉर्म पर सरकार की सख्ती, इस मंत्रालय ने जारी की एडवाइजरी

Samay Raina Indias Got Latent 

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शो इंडियाज गॉट लेटेंट (India's Got Latent) बीते कई दिनों से लगातार विवादों में है. इस शो के एक एपिसोड में जबसे रणवीर अल्लाहबादिया (Ranveer Allahbadia) ने पेरेंट्स से जुड़ा एक विवादित बयान दिया था, तबसे देश भर में उनकी आलोचना हो रही है. रणवीर के अलावा समय रैना (Samay Raina) और अपूर्वा मखीजा (Apoorva Makhija) के खिलाफ भी शिकायत दर्ज कराई गई है. अब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर परोसे जा रहे कंटेट को लेकर सख्ती अपनाई है.

हाल ही में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को एक एडवाइजरी जारी की है. इसमें कंटेंट के आयु-आधारित वर्गीकरण को सख्त करने और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियम 2021 का अनुपालन करने का आग्रह किया गया है. एक प्रेस रिलीज जारी कर कहा गया कि इस मंत्रालय को ऑनलाइन क्यूरेटेड कंटेंट (ओटीटी प्लेटफॉर्म) और सोशल मीडिया के कुछ प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित अश्लील, पोर्नोग्राफिक और अश्लील सामग्री के कथित प्रसार के संबंध में संसद के माननीय सदस्यों, वैधानिक संगठनों के अभ्यावेदन और सार्वजनिक शिकायतें प्राप्त हुई हैं.

प्रेस रिलीज में थीं ये अहम बातें
इस संबंध में कहा गया है कि सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया, आचार संहिता) नियम, 2021 के भाग-II में अन्य बातों के साथ-साथ ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए आचार संहिता और आचार संहिता के उल्लंघन से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए तीन स्तरीय संस्थागत तंत्र का प्रावधान है. 

आचार संहिता में अन्य बातों के साथ-साथ ओटीटी प्लेटफॉर्म से अपेक्षा की जाती है कि वे ऐसी कोई भी सामग्री प्रसारित न करें जो कानून द्वारा निषिद्ध हो, नियमों की अनुसूची में दिए गए सामान्य दिशानिर्देशों के आधार पर सामग्री का आयु-आधारित वर्गीकरण करें, 'ए' रेटेड सामग्री के लिए एक बच्चे द्वारा ऐसी सामग्री तक पहुंच को प्रतिबंधित करने के लिए पहुंच नियंत्रण तंत्र का कार्यान्वयन करें और उचित सावधानी और विवेक का प्रयोग करें. 

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होगा ये एक्शन
महिलाओं का अभद्र चित्रण अधिनियम, 1986, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023, यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पीओसीएसक्यू) अधिनियम, और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम, 2000 के प्रावधानों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया जाता है, जिसमें अश्लील/अश्लील सामग्री का प्रकाशन दंडनीय अपराध है.

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