एंटरटेनमेंट
बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाना नामुमकिन नहीं मगर बहुत मुश्किल जरूर है. ऐसी ही कठिन परिस्थितियों से गुजर कर और संघर्ष भरे महीने साल मायानगरी मुम्बई में गुजार कर बतौर गीतकार संगीतकार एक रचनाकार ने लोकप्रियता का दीपक जलाया है जिसका नाम है दीपक अग्रवाल, कई मशहूर गाने जिनके नाम के साथ दर्ज हैं.
लाखों-करोड़ों कलाकारों की भीड़ में अपनी अलग पहचान गढ़ने वाले दीपक अग्रवाल फिरोजाबाद के रहने वाले हैं. कम उम्र से ही संगीत सीखना शुरू किया और अपने सपनों को साकार करने के लिए मुंबई चले आए . पहले उन्होंने अपना सफर गीतकार के रूप मे शुरू किया. 2013 में आई फिल्म “ज़िंदगी 50-50” उनके करियर की डेब्यू मूवी थी जिसका टाइटल सॉन्ग उन्होंने लिखा और जिसे बप्पी लाहिरी ने अपनी आवाज़ दी.
बतौर संगीतकार दीपक अग्रवाल की पहली फिल्म “खेल तो अब शुरू होगा” थी जो 2016 में रिलीज़ हुई और इसका टाइटल ट्रैक शाहिद माल्या और पोमिता दत्ता ने गाया था. फिर फिल्म जीना इसी का नाम है का टाइटल ट्रैक के.के. की आवाज़ में,. एक कहानी जूली की का गीत “फनारी” ममता शर्मा और अमित गुप्ता की आवाज़ में सामने आया.
फिल्म ब्लैक मार्केट का “आ मेरे पास”, रक्तधार, का टाइटल ट्रैक , जाने क्यों दे यारों का “बारी बारी” और लव इन ए टैक्सी के गाने “सफ़र” और “कभी-कभी” दीपक अग्रवाल ने क्रिएट किए.
दीपक अग्रवाल की एक विशेषता यह है कि अपने हर गाने मे कुछ नई चीज़ों को नए ढंग से पेश करते हैं, जिससे श्रोताओं और दर्शकों को कुछ नया और ताज़ा सुनने देखने को मिलता है. यही वजह है कि उनके गीत श्रोताओं की रूह तक पहुंचते हैं. दीपक अग्रवाल ने बतौर गीतकार फिल्म तिश्नगी के “सूफी सलाम” में अपने कलम का जादू दिखाया जिसे राहत फतेह अली खान ने आवाज दी. मासूम के “गुजारिश” में जावेद अली और ‘ऊप्स अ देसी’ के “उड़ ले रे” जैसे गानों में उनकी कलम मे गहराई दिखी.
दीपक अग्रवाल के जल्द ही कुछ और गाने आने वाले हैं जिनमें उनकी लेखनी और संगीत का करिश्मा नजर आएगा.
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