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Gautam Adani हैं Sanjay Dutt की इस फिल्म के दीवाने, बोले- खाली कॉमेडी नहीं बल्कि...

अडानी ग्रुप के अध्यक्ष गौतम अडानी ने शुक्रवार को संजय दत्त की फिल्म मुन्ना भाई एमबीबीएस की तारीफ में कुछ बातें कहीं. उन्होंने कहा कि फिल्म "न केवल हंसी के लिए, बल्कि संदेश के लिए भी है."

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Gautam Adani हैं Sanjay Dutt की इस फिल्म के दीवाने, बोले- खाली कॉमेडी नहीं बल्कि...
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राजकुमार हिरानी की मुन्ना भाई एमबीबीएस ने हमें याद दिलाया कि "सच्चा उपचार सर्जरी से कहीं आगे तक जाता है", अडानी ग्रुप के अध्यक्ष गौतम अडानी ने शुक्रवार को इस फिल्म के बारे में बात की जो उनकी सर्वकालिक पसंदीदा फिल्मों में से एक है, उन्होंने कहा, "न केवल हंसी के लिए, बल्कि संदेश के लिए भी है." श्री अडानी, सोसाइटी फॉर मिनिमली इनवेसिव स्पाइन सर्जरी-एशिया पैसिफिक के 5वें वार्षिक सम्मेलन में बोल रहे थे, जब उन्होंने संजय दत्त अभिनीत फिल्म के प्रति अपनी पसंद के बारे में एक किस्सा सुनाया.  

गौतम अडानी ने कही ये बात

उन्होंने कहा, "मैं अपनी एक निजी बात साझा करना चाहता हूं. मेरी सबसे पसंदीदा फिल्मों में से एक मुन्ना भाई एमबीबीएस है. सिर्फ हंसी के लिए नहीं, बल्कि संदेश के लिए भी है. मुन्नाभाई सिर्फ दवा से लोगों का इलाज नहीं कर रहे थे, वे उन्हें मानवता से ठीक कर रहे थे. इसने हम सभी को याद दिलाया कि असली इलाज सर्जरी से कहीं आगे जाता है." 

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उन्होंने आगे कहा कि कहा, "चिकित्सा आशा है और चिकित्सा मानवता है." उन्होंने कहा, "जैसा कि मुन्ना भाई ने कहा था - चाहे वह जादू हो या सर्जरी - दोनों में एक ही चीज समान है, और वह है मानवता." गौतम अडानी ने उस समय को याद किया जब उन्होंने 16 साल की उम्र में मुंबई जाने का साहसिक फैसला लिया था. उन्होंने कहा, "मैंने द्वितीय श्रेणी का रेल टिकट खरीदा और बिना किसी डिग्री, नौकरी और बिना किसी सहारे के मुंबई के लिए रवाना हो गया, सिवाय अपनी राह खुद तय करने की तीव्र इच्छा के. अगर आप किसी चीज को दिल से चाहते हैं, तो पूरी कायनात उसे आपसे मिलवाने में लग जाती है." 

गौतम अडानी ने सुनाया किस्सा 

उन्होंने बताया कि मुंबई में उन्होंने "हीरों को छांटना और चमकाना" सीखना शुरू किया. उन्होंने कहा, "हर पत्थर को चमकाने से मुझे धैर्य, सटीकता और लगन की सीख मिली. एक जापानी खरीदार के साथ मेरे पहले सौदे से मुझे 10,000 रुपये का कमीशन मिला. पैसे का कभी कोई महत्व नहीं रहा. बस उस पल का महत्व था - क्योंकि यही वह क्षण था जब मुझे एहसास हुआ कि मेरे विश्वासों को हमेशा मेरे संदेहों पर भारी पड़ना होगा." उन्होंने आगे कहा, "और उद्यमिता के बारे में यही सच्चाई है. इसकी शुरुआत कभी किसी बड़े सपने से नहीं होती. इसकी शुरुआत दृढ़ विश्वास की चिंगारी से होती है."

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