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पाकिस्तान का पहला रोमांटिक हीरो, सालों तक इंडस्ट्री पर किया राज, 'विदेश मंत्री' के नाम से भी थे फेमस

पाकिस्तान के सुपरस्टार Santosh Kumar के बारे में आपने भले ही कम सुना हो पर वो पड़ोसी मुल्क के पहले रोमांटिक हीरो थे. उनकी फैन फॉलोइंग उस जमाने में काफी हुआ करती थी.

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पाकिस्तान का पहला रोमांटिक हीरो, सालों तक इंडस्ट्री पर किया राज, 'विदेश मंत्री' के नाम से भी थे फेमस

superstar Santosh Kumar (pc: Santosh & Brothers Star Fan Club fb page)

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पाकिस्तान की फिल्म इंडस्ट्री का आज दुनियाभर में नाम है. हालांकि पड़ोसी मुल्क की फिल्म इंडस्ट्री बॉलीवुड से काफी छोटी है पर इस इंडस्ट्री में कई बड़े कलाकार हैं, जो दुनिया भर में काफी मशहूर हैं. समय के साथ इस इंडस्ट्री में भी बहुत बदलाव आए हैं और अब यह तेजी से आगे बढ़ रही है. पर क्या आप जानना चाहते हैं कि पाकिस्तान का पहला रोमांटिक हीरो कौन था? हम आपको बताते हैं उस सुपरस्टार के बारे में जो पाकिस्तानी फिल्म इंडस्ट्री का जाना माना नाम रहा है.

हम बात कर रहे हैं पाकिस्तानी सुपरस्टार संतोष कुमार की जिनका असल नाम सैयद मूसा रजा था. 25 दिसंबर, 1925 को ब्रिटिश भारत के लाहौर में जन्मे मूसा ने ब्रिटिश भारत के उस्मानिया यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की थी. वो पढ़ाई में अच्छे थे और इसकी के चलते उन्होंने आईसीएस का एक्जाम भी दिया जिसमें वो पास भी हो गए थे. माना जाता है कि जब वे सिविल सेवा की तैयारी कर रहे थे, तो उनका ध्यान फिल्मों की ओर बढ़ा. ऐसे में विभाजन के बाद, उनके परिवार ने वर्तमान पाकिस्तान के लाहौर में जाने का फैसला किया, जहां उन्होंने उर्दू और पंजाबी फिल्मों में काम करना शुरू किया था.

भाई भी फिल्म इंडस्ट्री में थे एक्टिव
संतोष साल 1950 और 1960 के दशक में पाकिस्तानी फिल्म इंडस्ट्री में लोकप्रिय थे. उन्हें पाकिस्तान के पहले रोमांटिक हीरो के रूप में भी जाना जाता है और उन्हें अक्सर पाकिस्तानी सिनेमा में उनकी भूमिका के लिए पहचाना जाता है. उनके भाई दर्पण भी उसी दौर में एक फिल्म अभिनेता थे, जबकि उनके दूसरे भाई एस. सुलेमान एक फिल्म निर्देशक थे.

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विदेश मंत्री के नाम से थे मशहूर
अपनी शिक्षा और जागरूकता के कारण संतोष कुमार को हमेशा विदेश में आयोजित बैठकों में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व करने के लिए दल का नेतृत्व करने के लिए नियुक्त किया जाता था. इसी वजह से उन्हें पाकिस्तानी फिल्म इंडस्ट्री के विदेश मंत्री के रूप में जाना जाने लगा. उन्होंने 60 के दशक में रेडियो पाकिस्तान के एक प्रोग्राम में इस बात का खुद खुलासा किया था.

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