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बॉलीवुड के शोमैन के बारे में तो सब जानते हैं पर क्या आप शोवुमन को जानते हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि राज कपूर से पहले ही वो महिला इंडस्ट्री में एंट्री कर चुकी थी.
हिंदी सिनेमा के शोमैन राज कपूर आज भी करोड़ों दिलों पर राज करते हैं. उन्हें उनकी फिल्मों और प्रतिभा के कारण 'शोमैन' का टैग दिया था. पर शायद ही कोई जानता है कि उनसे पहले हिंदी सिनेमा में एक 'शोवुमन' भी थी. जी हां, भले ही आज उन्हें कम लोग जानते हैं पर वो फिल्म इंडस्ट्री में किसी मिसाल से कम नहीं है. आपको जानकर हैरानी होगी कि वो शोवुमन बिहार की एक जानी मानी तवायफ थी. बावजूद इसके उन्होंने फिल्मों में खूब काम किया.
हम बात कर रहे हैं मशहूर अभिनेत्री जद्दनबाई की, जो एक्टिंग करने के साथ ही साथ फिल्में भी बनाती थीं. वो गाना गाती थीं और संगीत भी तैयार करतीं. एक समय था जब सभी उनके दीवाने हुआ करते थे. यहां तक कि ऊंचे घरानों के पुरुष भी उनके कायल थे पर अंग्रेज उनसे नफरत करते थे. जद्दनबाई साल 1933 मेें आई फिल्म 'राजा गोपीचंद' में नजर आईं. इस फिल्म में उन्होंने एक मां की भूमिका निभाई जिसने उन्हें खूब शोहरत दिलाई. एक्टिंग के अलावा उन्होंने अपने खुद का प्रोडक्शन हाउस भी खोला.
हालांकि उनकी निजी जिंदगी भी काफी फिल्मी रही है. जद्दनबाई के पहले पति एक बिजनेसमैन थे. उनका नाम था नरोत्तम दास थे. नरोत्तम उनसे इतना प्यार करते थे कि उनके लिए उन्होंने इस्लाम धर्म तक अपना लिया था. हालांकि बेटे के जन्म के बाद नरोत्तम ने जद्दनबाई को छोड़ दिया था. फिर उनकी दूसरी शादी उस्ताद इरशाद से हुई और वो भी ज्यादा समय तक नहीं चल सका.
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जद्दनबाई मशहूर अदाकारा नरगिस की मां थीं. वो अपनी बेटी नरगिस को फिल्म इंडस्ट्री में तब लाईं जब वो सिर्फ 6 साल की थी. जद्दनबाई की मुलाकात कलकत्ता में मोहन बाबू से हुई जो एक धनी परिवार से थे. उन्होंने जद्दनबाई के लिए अपना धर्म भी बदल लिया था. उनकी और मोहन की बेटी थीं नरगिस. नरगिस को उनकी मां फातिमा कहती थीं, जबकि उनके पिता ने उन्हें उत्तम चंद मोहन चंद दिया था.
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जद्दनबाई के निजी जीवन में उतार-चढ़ाव तो बहुत आए, फिर भी उनकी लोकप्रियता बढ़ती रही. अंग्रेजों उनसे परेशान रहते थे और नफरत करते थे. उन्हें संदेह था कि जद्दनबाई ने क्रांतिकारियों को शरण दी है.
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