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Asrani Passed Away: 'हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं...' असरानी के 10 मशहूर डायलॉग, जो रहेंगे 'अमर'

Asrani Passed Away: बॉलीवुड एक्टर गोवर्धन असरानी का 84 साल की उम्र में निधन हो गया है. आज हम आपको उनके 10 मशहूर डायलॉग बताने डा रहे हैं.

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Asrani Passed Away: 'हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं...' असरानी के 10 मशहूर डायलॉग, जो रहेंगे 'अमर'

असरानी के 10 मशहूर डायलॉग

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दिवाली के मौके पर बॉलीवुड से दुखद खबर सामने आ रही है. दिग्गज एक्टर और कॉमेडियन गोवर्धन असरानी (Asrani Death) का निधन हो गया है. वो लंबे समय से बीमार थे और उन्होंने 84 साल की उम्र में सोमवार 20 अक्टूबर को दोपहर करीब 3 बजे अस्पताल में आखिरी सांस ली. असरानी की मौत से बॉलीवुड जगत में शोक की लहर है. इस दुखद मौके पर आज आपको हम 10 मशहूर डायलॉग बताने जा रहे हैं. आइए जानते हैं कि उनके कौनसे डॉयलोग हैं. 

असरानी का सबसे फेवरेट डायलॉग

बॉलीवुड में असरानी की दिग्गज कॉमेडियन एक्टर के तौर पर होती थी. एक समय ऐसा था बगैर असरानी के कॉमेडी के फिल्में हिट ही नहीं होती थी. 1975 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म शोले में असरानीने जेलर का रोल निभाया था. इस किरदार में उन्होंने दर्शकों को इतना हंसाया की उनका डायलॉग 'हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं…' आज भी बड़ा पॉपुलर है. रोल चार्ली चैपलिन और हिटलर की स्टाइल में उनका यह किरदार लोगों को खूब पसंद आया था.

असरानी के 10 मशहूर डायलॉग 

  • आधे इधर जाओ, आधे उधर जाओ, बाकी मेरे पीछे आओ.
  • हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं.
  • 100 रुपए किलो नींबू.
  • जूस कंजूस उल्लू का पट्ठा.
  • गया, प्यारे लाल जी, ₹200 निकालिए काहे के ₹200.
  • सक्सेस के पीछे मत भागो.
  • कभी-कभी गलत ट्रेन भी सही स्टेशन पर पहुंचा देती है.
  • रिस्क तो स्पाइडर मैन को भी लेना पड़ता है, मैं तो फिर भी एक सेल्समैन हूं.
  • गुज़रता हुआ वक़्त बड़े से बड़े मसले को सुलझाता है.
  • अच्छे वक्त की कड़वाहट...बुरे वक्त के बाद ही होती है.
  • हाथी चले बाजार...कुत्ते भौंके हजार
  • पति-पत्नी की नाराज़गी गर्मी की बरसात की तरह होती है... जो हमेशा नहीं रहती.
  • वो रोज रात को नए घाट का पानी पीती है.

350 से ज्यादा फिल्मों किया है काम

राजस्थान के जयपुर के रहने असरानी ने 84 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहा है. उन्होंने जयपुर के सेंट जेवियर्स स्कूल से पढ़ाई की. पढ़ाई पूरी करने के बाद वह मुंबई आ गए और यहां थियेटर्स बगैरा में काम करने लगे. असरानी का पहला बड़ा ब्रेक 1967 में आई फिल्म 'हरे कांच की चूड़ियां' से मिला. हालांकि उन्होंने 350 से भी ज्यादा फिल्में की है और वो एक दिग्गज कलाकारों की लिस्ट में शुमार थे. 

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