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मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने की Tamannaah Bhatia से पूछताछ, जानें क्या है माजरा

तमन्ना भाटिया (Tamannaah Bhatia) से गुरुवार को ईडी ने पूछताछ की है. यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है. इस मामले में एक्ट्रेस का बयान गुवाहाटी में ईडी जोनल ऑफिस में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत दर्ज किया गया था.

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मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने की Tamannaah Bhatia से पूछताछ, जानें क्या है माजरा

Tamannaah Bhatia: तमन्ना भाटिया

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तमन्ना भाटिया (Tamannaah Bhatia) ऐसे तो अपने काम और पर्सनल लाइफ को लेकर चर्चा में बनी रहती हैं. लेकिन इस बार वह किसी और कारण से खबरों में हैं. दरअसल, गुरुवार को ईडी ने तमन्ना भाटिया से पूछताछ की है. एक्ट्रेस को एचपीजेड टोकन मोबाइल ऐप से जुड़ी जांच के मामले में पूछताछ के लिए बुलाया गया था, जिसमें बिटकॉइन और कुछ अन्य क्रिप्टोकरेंसी के बहाने कई निवेशकों को कथित तौर पर धोखा दिया गया था. 

एजेंसी ने एक बयान में कहा कि तमन्ना भाटिया का बयान गुवाहाटी में ईडी जोनल ऑफिस में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत दर्ज किया गया था. सूत्रों ने इस मामले में पीटीआई को बताया कि 34 साल की एक्ट्रेस को एचपीजेडी टोकन ऐप के ऑफिस में सेलिब्रिटी अपीयरेंस के लिए कुछ फंड्स मिले हैं, जिसकी फिलहाल मनी लॉन्ड्रिंग के लिए जांच चल रही है. 

तमन्ना पर नहीं लगे चार्ज

सूत्रों ने ये भी बताया कि तमन्ना के खिलाफ कोई चार्ज नहीं लगाए गए हैं. उन्होंने बताया कि उन्हें पहले भी बुलाया गया था लेकिन उन्होंने काम के कारण समन को टाल दिया था और गुरुवार को पेश होने का फैसला किया था.

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299 संस्थाओं पर लगा आरोप

बता दें कि मार्च के महीने में इस मामले में ईडी ने आरोप पत्र दायर किया था जिसमें कुल 299 संस्थाओं को आरोपी के तौर पर नामित किया है, जिसमें से 76 चाइनिज कंट्रोल्ड संस्थाएं हैं और 10 डायरेक्टर चाइना के हैं. जबकि दो संस्थाएं अन्य विदेशी नागरिक चलाते हैं. बिटकॉइन और बाकी क्रिप्टोकरेंसी के माइनिंग में भारी रिटर्न का दावा करके इसमें निवेशकों को धोखा देने के आरोप में ऐप से जुड़े कई आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है.

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पुलिस ने मामले में कहा कि एचपीजेड टोकन मोबाइल फोन एप्लीकेशन का इस्तेमाल आरोपियों की टीम ने निवेशकों को धोखा देने के लिए किया था. अपराध को छिपाने के लिए ऐप से जुड़े बैंक खाते और मर्चेंट आईडी डमी निर्देशकों द्वारा चलाई जा रही शेल कंपनियों के जरिए खोले गए थे. एफआईआर में दावा किया गया है कि ये धनराशि अवैध ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी और बिटकॉइन माइनिंग के लिए निवेश के लिए धोखाधड़ी से पाई गई थी. 

ईडी ने अपने बयान में बताया कि 57 हजार रुपये के निवेश पर तीन महीने तक हर रोज 4000 रुपये का रिटर्न देने का दावा किया गया था, लेकिन केवल एक बार दिया गया था. एक बार रिटर्न के बाद निवेशकों से नए फंड की मांग की गई. इस मामले में ईडी ने कंट्री-वाइड सर्च का काम किया है, जिसमें 455 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति और जमा राशि जब्त की गई. 

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