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नहीं होगा Shah Rukh Khan के बंगले का रिनोवेशन? कानूनी मुश्किलों में फंसा Mannat

शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) के घर मन्नत के रेनोवेशन शुरू होने से पहले वह एक कानूनी मुश्कल में फंस गया है. दरअसल, एक कार्यकर्ता ने शाहरुख पर धोखाधड़ी और नोवेशन की प्लानिंग में उल्लंघनों को लेकर शिकायत की है.

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शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) बॉलीवुड के बहुत बड़े स्टार हैं. वहीं, इन दिनों शाहरुख अपने घर मन्नत (Mannat) को रिनोवेट करने की प्लानिंग कर रहे हैं. हालांकि रिपोर्ट्स सामने आई है कि निर्माण और रिनोवेशन के काम के लिए एक्टर अपने परिवार के साथ अस्थायी रूप से अपने इस घर को छोड़ रहे हैं. लेकिन रिनोवेशन के इस काम के बीच एक्टर का बंगला कानूनी मुश्किलों में फंस गया है. 

दरअसल, एक कार्यकर्ता ने रिनोवेशन की प्लानिंग में उल्लंघनों के बारे में चिंता जताई है और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल(एनजीटी) से हस्तक्षेप करने और काम को रोकने के लिए रिक्वेस्ट की है. सोमवार को बार एंड बेंच ने बताया कि सामाजिक कार्यकर्ता संतोष दौंडकर ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें आरोप लगाया है कि शाहरुख खान और महाराष्ट्र कोस्टल जोन मैनेजमेंट अथॉरिटी ने मन्नत में रेस्टोरेशन के लिए जरूरी कोस्टल रेगुलेशन जोन की मंजूरी प्राप्त करते हुए नियमों का उल्लंघन किया है. बंगले को ग्रेड III हेरिटेज बिल्डिंग के रूप में माना गया है, जिसका मतलब है कि इसकी संरचना में किसी भी बदलाव के लिए पहले उचित अनुमति लेनी होगी.

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धोखाधड़ी का भी लगा शाहरुख पर आरोप

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि शाहरुख खान अपने छह मंजिला बंगले में दो और मंजिलें जोड़ना चाहते हैं. याचिका में शाहरुख पर धोखाधड़ी का भी आरोप लगाया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उन्होंने 12 वन-बेडरूम वाले फ्लैटों को अपने परिवार के लिए एक ही आवास में मिला दिया है, जो मूल रूप से मास-हाउसिंग के लिए था.

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कार्यकर्ता को पेश करने होंगे सबूत

एनजीटी ने अब दौंडकर को अपने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करने का आदेश दिया है. न्यायिक सदस्य दिनेश कुमार सिंह और एक्सपर्ट मेंबर विजय कुलकर्णी की पीठ ने कहा, '' अगर प्रोजेक्ट प्रस्तावक या एमसीजेडएमए ने इन चीजों का उल्लंघन किया है तो अपीलकर्ता को इसे चार सप्ताह के अंदर खास तौर से इसके लिए सबूतों के साथ पेश किया जा सकता है, ऐसा न करने पर हमारे पास इस ट्रिब्यूनल के आदेश का पालन न करने के लिए इस अपील को खारिज करने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं बचेगा. एनजीटी 23 अप्रैल को इस मामले में फिर से सुनवाई करेगा.

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