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'आप मुझे मरवाना चाहते हो', जब डायरेक्टर की बातें सुन Javed Akhtar ने दिया था ये जवाब

जावेद अख्तर (Javed Akhtar) ने (Ashutosh Gowariker) की फिल्म स्वदेस (Swades) के रामलीला सॉन्ग पल पल है भारी (Pal Pal Hai Bhaari) को लेकर एक किस्सा सुनाया है.

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'आप मुझे मरवाना चाहते हो', जब डायरेक्टर की बातें सुन Javed Akhtar ने दिया था ये जवाब

Javed Akhtar

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जावेद अख्तर (Javed Akhtar) फिल्म इंडस्ट्री का जाना माना नाम है. वह अपने शानदार लेखन के लिए और बेबाक बयानबाजी के लिए जाने जाते हैं. वहीं, हाल ही में जावेद अख्तर ने आशुतोष गोवारिकर (Ashutosh Gowariker) की फिल्म स्वदेस (Swades) के रामलीला सॉन्ग पल पल है भारी (Pal Pal Hai Bhaari) को लेकर एक किस्सा सुनाया है. उन्होंने बताया है कि इस गाने को लेकर वह कितने ज्यादा तनाव में थे और लगातार उनके दिमाग में नेगेटिव ख्याल आ रहे थे, जिससे उनकी सेहत पर भी असर पड़ा था. 

दरअसल, हाल ही में O2India यूट्यूब चैनल से बातचीत के दौरान जावेद ने पल पल है भारी गाने को लेकर बात की. उन्होंने कहा कि आशुतोष ने उन्हें वाय बुलाया था, जहां पर फिल्म की शूटिंग कर रहे थे. उन्हें वहां पर बुलाने के बाद इस बारे में बताया गया कि उन्हें एक गाना लिखना है, क्योंकि एआर रहमान एक महीने के लिए किसी काम से कहीं जा रहे हैं और इसलिए उन्हें यह गाना जल्द से जल्द रिकॉर्ड करना होगा.

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जावेद ने आगे कहा कि, '' इसके बाद मैने डायरेक्टर से फिल्म की कहानी को लेकर पूछा, जिसे सुन वह हैरान रह गए थे. दरअसल, जो गाना लिखा जाना था वह रामायण से इंस्पायर था, क्योंकि फिल्म में रामलीला का सीन दिखाया जाता है. जहां पर सीता को अशोक वाटिका में रावण बंधक बना लेता है और जहां पर माता सीता से भगवान राम के बारे में पूछा जाता है और इसके जवाब में सीता राम के बारे में बताती हैं.

जावेद ने डायरेक्टर से कही थी ये बात

जावेद ने कहा, '' मैंने उसने कहा कि आपने मेरी हत्या करवाने के लिए एकदम सही इंतेजाम किया है. क्या आपको पता है कि यह बहुत ही सेंसिटिव विषय है? रावण राम के बारे में सवाल कर रहा है और सीता जवाब दे रही हैं. आप मुझसे यह गाना लिखने के लिए कह रहे हैं? अगर आपने मुझे मुंबई में इसके बारे में बताया होता है तो मैं कम से कम रामचरितमानस जैसी कुछ जरूरी किताबें अपने साथ ले आता और देखना की मैं उनसे क्या अच्छा लिख सकता हूं. यह उस वक्त का दौर था जब देश भर में राम मंदिर का आंदोलन जोरों पर था. मैंने उन्हें इसके लिए साफ मना कर दिया कि मैं नहीं कर सकता.

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मानसिक तनाव में थे जावेद

जावेद ने बताया कि वह इस गाने को लेकर काफी तनाव में थे और इसके कारण वह जल्द ही रात को हो गए थे और सुबह भी गाना लिखने के लिए जल्दी उठ गए थे. हालांकि वह किसी भी बहाने से इससे पीछे हटना चाहते थे, लेकिन जैसे तैसे उन्होंने महज दो घंटे में गाना लिख डाला. 

जावेद को गाने के लिए मिली थी तारीफें

जावेद ने आखिर में बताया कि, '' जब यह गाना रिलीज हुआ, तो एक बेहद पढ़े लिखे व्यक्ति से मैं मिला और उन्हें रामायण और रामचरितमानस के बारे में बहुत सी जानकारी है. उन्होंने मुझसे इस गाने को लेकर कहा कि आपने बहुत अच्छा काम किया है. आपने तुलसीदास की लिखी हुई पंक्तियों का जिस तरह से गाने में इस्तेमाल किया है वह शानदार है, लेकिन मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी. आज तक मुझे लगता है कि मैंने इसे या तो अपने बचपन में सुना होगा, क्योंकि हम बहुत सारी रामलीलाओं में हिस्सा लेते थे और जब मुझे कुछ मदद चाहिए होती थी, तो मेरा दिमाग हमेशा मुझे बस यही जानकारी देता था. यही एकमात्र लाइन थी जो मुमकिन थी और इसलिए मैंने उसे चुना था.''

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