बॉलीवुड
Why Bollywood movies failing: हाल के दिनों में आई कई बॉलीवुड फिल्मों को फ्लॉप होने के नाम से संतोष करना पड़ रहा है. वहीं साउथ की फिल्में रिलीज होने के बाद हिंदी बॉक्स ऑफिस पर बेलगाम दौड़ती नजर आ रही हैं. आखिर क्या है हिंदी फिल्मों के फ्लॉप होने की वजह?
डीएनए हिंदी: Why Bollywood movies failing: हाल ही में रिलीज रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) की फिल्म शमशेरा (Shamshera) बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप होती नजर आ रही है. फिल्म के प्रति दर्शक वह प्यार नहीं दिखा पा रहे हैं, जैसा इससे उम्मीद किया गया था. यशराज बैनर के तले बनी बैक टू बैक फिल्मों को फ्लॉप का मुंह देखना होगा, ऐसा कभी यशराज फिल्म्स के चेयरमैन आदित्य चोपड़ा ने नहीं सोचा होगा. इन फिल्मों के अलावा बड़े स्टार्स की बीती फिल्मों की बात करें जिन्होंने हाल ही में बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप होने का स्वाद चखा है, जिसमें शाहिद कपूर की जर्सी, अक्षय कुमार की बच्चन पांडे शामिल है.
सवाल अब वाजिब हो जाता है कि जिन स्टार्स ने बॉक्स ऑफिस पर अपनी फिल्मों से धूम मचा दी थी आखिर उनकी फिल्में क्यों फ्लॉप हो रही हैं?
ओरिजिनल स्टोरी की कमी: बॉलीवुड की फिल्मों में साउथ की फिल्मों के रीमेक का चलन नया नहीं है. बड़े स्टार्स जैसे आमिर खान और सलमान खान की फिल्में साउथ की बड़ी फिल्मों की रीमेक रही हैं. गजनी और वॉन्टेड जैसी फिल्में भले ही बॉक्स ऑफिस पर शानदार रही हैं लेकिन फिल्म की कहानी के पक्ष से इन फिल्मों पर साउथ की फिल्मों की कॉपी होने का दाग लगा है.
रीमेक का खराब स्तर: यदि रीमेक से ही फिल्मों के हिट होने के बात रहती तो हाल के दिनों में कई रीमेक फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर नकार दिया गया है. मशहूर फिल्म 'सैराट' को हिंदी में 'धड़क' के तौर पर बनाया गया था. मगर सही तरह से उस फिल्म का एग्जीक्यूशन न होना, धड़क के फ्लॉप होने के पीछे जिम्मेदार हो सकता है. सैराट की कहानी मराठी समाज से काफी कनेक्ट करती है, वहीं धड़क से हिंदी के दर्शक कनेक्ट नहीं कर पाए.
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बेहतर स्टारकास्ट को सेलेक्ट न करना: किसी भी फिल्म के लिए स्टार कास्ट उसकी जान होते हैं. गलत स्टारकास्ट का चुनाव फिल्म की किस्मत को तय करता है. हाल के दिनों में रिलीज हुई फिल्म 'निकम्मा' वह उदाहरण है, जो साउथ के बड़े स्टार नानी की फिल्म 'मिड्ल क्लास अबाई' की रीमेक रही. 'निकम्मा' में अभिमन्यु दासानी और शिल्पा शेट्टी नजर आए, फिल्म एक्टिंग के स्तर पर कमजोर रही और फ्लॉप हो गई.
ऑडियंस का बदलता टेस्ट: आज के दौर में ऑडियंस को भी वो फिल्में डब के तौर पर आसानी से सुलभ हो जाती हैं, जिनका उनकी ओरिजिनल लैंग्वेज में काफी शोर है. ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स की सीरीज 'मनी हाइस्ट' की मूल भाषा स्पेनिश थी मगर दुनिया भर के दर्शकों ने इस सीरीज को सराहा. इसका मतलब अब ये हो गया है कि ऑडियंस सिर्फ बॉलीवुड की फिल्मों तक की सीमित नहीं रहे हैं. उन्होंने डब के साथ-साथ सब-टाइटल के साथ जूझना सीख लिया है.
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हाल के दिनों में बॉलीवुड का बॉयकॉट: सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद बहुत से लोगों ने बॉलीवुड फिल्मों में भाई-भतीजावाद को लेकर कई इल्जाम लगाए गए. दर्शकों ने बॉलीवुड फिल्मों का बायकॉट करना शुरू कर दिया. मुनासिब है कि हिंदी फिल्मों पर इन दर्शकों की तरफ से बॉयकॉट किए जाने का भी प्रभाव हो.
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