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डॉ. दिव्यकीर्ति सोशल मीडिया पर बहुत लोकप्रिय हैं और लोग उनकी पत्नी के बारे में जानना चाहते हैं. जानें कौन हैं तरुणा वर्मा जो बनीं उनकी जीवन संगिनी
अगर आप यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो आपने डॉ. विकास दिव्यकीर्ति के बारे में जरूर सुना होगा. वह एक जाने-माने शिक्षक हैं जो स्टूडेंट्स को यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा के लिए तैयार करते हैं. डॉ. दिव्यकीर्ति सोशल मीडिया पर बहुत लोकप्रिय हैं. इंस्टाग्राम पर कई पेज उनके लेक्चर की छोटी क्लिप्स शेयर करते रहते हैं. उनके निजी YouTube चैनल के 2.95 मिलियन सब्सक्राइबर हैं और उनके कोचिंग संस्थान दृष्टि IAS के 11 मिलियन से ज़्यादा फ़ॉलोअर हैं.
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तरुणा वर्मा हैं विकास दिव्यकीर्ति की पत्नी
साल 1998 में डॉ. दिव्यकीर्ति की शादी तरुणा वर्मा से हुई जो पीएचडी डिग्री धारक हैं और दृष्टि आईएएस की निदेशक हैं. तरुणा वर्मा के इंस्टाग्राम पर भी 65.5K फॉलोअर्स हैं. हरियाणा के भिवानी से ताल्लुक रखने वाले डॉ. विकास दिव्यकीर्ति का जन्म 26 दिसंबर 1973 को हुआ था और वे एक मध्यमवर्गीय परिवार में पले-बढ़े. उनकी मां भिवानी में पीजीटी टीचर थीं और उनके पिता महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में हिंदी साहित्य के जाने-माने प्रोफेसर थे. उनके दो बड़े भाई सीबीआई में डीआईजी और अमेरिका में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं.
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विकास दिव्यकीर्ति की पढ़ाई-लिखाई
अपनी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा भिवानी के सरस्वती शिशु मंदिर से पूरी होने के बाद डॉ. दिव्यकीर्ति ने हिंदी में स्नातक की डिग्री हासिल करने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय से सम्बद्ध ज़ाकिर हुसैन कॉलेज में एडमिशन लिया. एमफिल और पीएचडी डिग्री के अलावा उन्होंने हिंदी और अंग्रेजी में पोस्टग्रेजुएट डिग्री के साथ अपनी शैक्षणिक साख को आगे बढ़ाया. अपनी इस तगड़ी शैक्षिक पृष्ठभूमि के कारण ही उन्हें यूपीएससी उम्मीदवारों के लिए भारत के सबसे योग्य टीचर्स में से एक माना जाता है.
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टीचिंग के जुनून ने दृष्टि आईएएस के लिए किया प्रेरित
डॉ. दिव्यकीर्ति ने स्नातक करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाना शुरू किया. इस दौरान वे यूपीएससी परीक्षाओं की तैयारी भी करते रहे. अपने पहले प्रयास में ही उन्होंने 1996 में 384 की शानदार रैंक हासिल की. हालांकि उन्होंने कुछ समय के लिए गृह मंत्रालय में काम किया लेकिन टीचिंग के प्रति उनके जुनून ने उन्हें 1999 में दिल्ली के मुखर्जी नगर में दृष्टि आईएएस की स्थापना करने के लिए प्रेरित किया. दृष्टि आईएएस की निदेशक के रूप में तरुणा वर्मा भी इस सफलता के लिए काफी अहम रहीं. वह अपनी शैक्षणिक उपलब्धियों और नेतृत्व क्षमताओं के माध्यम से स्टूडेंट्स को हाई क्वॉलिटी वाली शिक्षा प्रदान करने के संस्थान के उद्देश्य में अहम योगदान देती हैं.
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