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कौन हैं बिहार की खस्ताहाल एजुकेशन सिस्टम को पटरी पर लाने वाले IAS? जानें UPSC में मिली थी कितनी रैंक

बिहार की खस्ताहाल शिक्षा व्यवस्था को अपनी सख्ती से पटरी पर लाने का श्रेय भी आईएएस केके पाठक को जाता है. जानें कितने पढ़े-लिखे हैं ये तेजतर्रार अफसर...

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कौन हैं बिहार की खस्ताहाल एजुकेशन सिस्टम को पटरी पर लाने वाले IAS? जानें UPSC में मिली थी कितनी रैंक

IAS KK Pathak

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केके पाठक बिहार के तेजतर्रार आईएएस अधिकारी हैं. वह सीएम नीतीश कुमार के करीबी अफसरों में से एक माने जाते हैं और अपने फैसलों की वजह से लगातार चर्चा में बने रहते हैं. बिहार की खस्ताहाल शिक्षा व्यवस्था को अपनी सख्ती से पटरी पर लाने का श्रेय भी आईएएस केके पाठक को जाता है. अपने आईएएस पिता से इंस्पायर होकर उन्होंने सिविल सेवा में जाने का सपना देखा और पढ़ाई पूरी करने के बाद यूपीएससी की तैयारी में जुट गए. आज हम आपको बताएंगे कि वो कितने पढ़े-लिखे हैं और उनका यूपीएससी का सफर कैसा रहा है.

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पिता भी थे आईएएस अधिकारी

केशव कुमार पाठक का जन्म 15 जनवरी 1968 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में हुआ था. उनके पिता का नाम मेजर जीएस पाठक है जो खुद एक सिविल सेवक थे और बिहार कैडर में तैनात थे. मेजर जीएस पाठक बिहार के लघु जल संसाधन विभाग में प्रधान सचिव के पद पर कार्यरत थे.

केके पाठक बचपन से ही पढ़ाई में काफी मेधावी थे और अपने पिता की तरह उन्होंने भी सिविल सेवक बनने का सपना देखा. उन्होंने इकोनॉमी से बीए किया और एमफिल भी किया और फिर सिविल सेवा की तैयारी में जुट गए. उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा सफलतापूर्वक पास की और उनकी रैंक टॉप 40 में थी.

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साल 1990 में वह बिहार कैडर में आईएएस के तौर पर शामिल हुए. उनकी पहली पोस्टिंग 18 अगस्त 1992 को कटिहार में एसडीओ (सब-डिवीजनल ऑफिसर) के पद पर हुई थी. तब से उन्होंने बिहार सरकार में कई प्रमुख पदों पर काम किया है और लगातार रैंक में तरक्की करते हुए पटना में राजस्व विभाग के अध्यक्ष के रूप में अपने वर्तमान पद पर पहुंचे हैं.

अब तक इन पदों पर कर चुके हैं काम

केके पाठक को डीएम के रूप में पहली पोस्टिंग साल 1996 में मिली और साल 2005 में जब बिहार में नीतीश कुमार की सरकार बनी तो उन्हें बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण के एमडी की जिम्मेदारी दी गई. इसके अलावा उन्हें बिहार आवास बोर्ड का सीएमडी भी बनाया गया. साल 2010 में वह केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली चले गए लेकिन नीतीश कुमार के अनुरोध पर उन्हें वापस बिहार भेजा गया. 

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साल 2016 में बिहार के शराबबंदी अभियान में उन्हें अहम जिम्मेदारी मिली. इसके बाद 2021 में उन्हें उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग में अपर मुख्य सचिव बनाया गया. जून 2023 में उन्हें  बिहार शिक्षा विभाग का अपर मुख्य सचिव बनाया गया. इस पद पर पहुंचते ही उन्होंने बड़े फैसले लेने शुरू किए और बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर इसका सकारात्मक असर देखने को मिला. केके पाठक को फेम इंडिया मैगजीन- एशियो पोस्ट 2021 में देश के प्रभावशाली ब्यूरोक्रेट के रूप में जगह दी.

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