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कौन हैं IFS जेपी सिंह जिनपर बनी है जॉन अब्राहम की फिल्म 'द डिप्लोमेट', अभी किस देश में हैं पोस्टेड

जॉन अब्राहम की फिल्म 'द डिप्लोमेट' आईएफएस अफसर जितेंद्र पाल सिंह के जीवन और पाकिस्तान में फंसी भारतीय लड़की उजमा अहमद केस पर आधारित है. जानें कौन हैं डिप्लोमेट जेपी सिंह

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कौन हैं IFS जेपी सिंह जिनपर बनी है जॉन अब्राहम की फिल्म 'द डिप्लोमेट', अभी किस देश में हैं पोस्टेड

John Abraham With IFS JP Singh

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जॉन अब्राहम की फिल्म 'द डिप्लोमेट' आते ही बॉक्स ऑफिस पर छा गई है. यह फिल्म सीनियर आईएफएस अफसर जितेंद्र पाल सिंह के जीवन और पाकिस्तान में फंसी भारतीय लड़की उजमा अहमद केस पर आधारित है. इस फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे भारतीय लड़की को देश में वापस पहुंचाने में राजनयिक जेपी सिंह ने कूटनीतिक सूझबूझ का परिचय दिया. इस फिल्म को देखने के बाद लोग भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी जेपी सिंह के बारे में और जानना चाहते हैं.  

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कौन हैं IFS जेपी सिंह

जे.पी. सिंह भारतीय विदेश सेवा के 2002 बैच के आईएफएस अधिकारी हैं और फिलहाल इजरायल में भारतीय राजदूत हैं. उन्होंने संजीव सिंगला की जगह ली है जो 2019-2024 तक इजरायल में भारत के राजदूत थे. जेपी सिंह ने अपने करियर में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान (PAI) डिवीजन में बतौर संयुक्त सचिव कई महत्वपूर्ण कूटनीतिक मिशनों को अंजाम दिया. उनकी सूझबूझ और डिप्लोमेसी की वजह से ही पाकिस्तान में फंसी भारतीय नागरिक उजमा अहमद की सुरक्षित देशवापसी हो पाई. 

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अपने राजनयिक करियर के दौरान सिंह ने कई अहम पदों पर काम किया. साल 2008-2012 तक उनकी पोस्टिंग अफगानिस्तान के काबुल में रही. उस दौरान  भारतीय दूतावास पर दो बड़े आतंकी हमले हुए थे. इसके बाद 2014-2019 तक वह पाकिस्तान में उप उच्चायुक्त के रूप में कार्यरत थे. इस दौरान उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक संबंधों को संभालने में अहम भूमिका निभाई. इसके अलावा वह अशरफ गनी सरकार के पतन के बाद अफगान तालिबान शासन के साथ बातचीत में विदेश मंत्रालय के मुख्य संपर्क अधिकारी के रूप में कार्यरत रहे. यहां उनकी भूमिका में अन्य जिम्मेदारियों के अलावा तालिबान के साथ बैकचैनल शुरू करना भी शामिल था.

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क्या था उजमा अहमद केस

2017 में दिल्ली की एक युवती उजमा अहमद ने पाकिस्तान में फंसे होने पर भारतीय उच्चायोग का दरवाजा खटखटाया. उजमा ने बताया था कि वह पाकिस्तान ताहिर अली से मिलने आई थी और ताहिर ने उसे बंदूक की नोक पर उसे शादी के लिए मजबूर किया. उसे पाकिस्तान में बंदी बना लिया और परेशान किया गया. उसकी दर्दनाक कहानी तब और भी भयावह हो गई जब उसे पता चला कि ताहिर पहले से ही शादीशुदा है. उजमा किसी तरह भागने में कामयाब रही भारतीय उच्चायोग में शरण ली. ताहिर ने इस्लामाबाद हाई कोर्ट में उसके खिलाफ केस कर दिया और कई हफ्तों तक चली कानूनी कार्यवाही के बाद कोर्ट ने उजमा के पक्ष में फैसला सुनाया और उसे भारत लौटने की अनुमति दी. 25 मई 2017 को उजमा वाघा बॉर्डर पार करके भारत वापस आ गई.

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