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आज हम आपको बताएंगे कि स्मिता सभरवाल कौन हैं, उनका फैमिली बैकग्राउंड कैसा है और उनका यूपीएससी का सफर कैसा रहा है?
तेलंगाना कैडर की आईएएस स्मिता सभरवाल को एआई जनरेटेड तस्वीर शेयर करने को लेकर साइबराबाद पुलिस से नोटिस मिला है. 31 मार्च को सभरवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक तस्वीर रि-पोस्ट की थी जिसमें हैदराबाद यूनिवर्सिटी के पास कांचा गाचीबोवली में 400 एकड़ के जमीन की एक एआई जनरेटेड तस्वीर में दो हिरण और मोर के साथ बुलडोजर दिखाई दे रहा है. आज हम आपको बताएंगे कि स्मिता सभरवाल कौन हैं, उनका फैमिली बैकग्राउंड कैसा है और उनका यूपीएससी का सफर कैसा रहा है?
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स्मिता सभरवाल वर्तमान में तेलंगाना के पर्यटन और संस्कृति विभाग में प्रिंसिपल सेक्रेटरी के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें 11 नवंबर 2024 को युवा उन्नति, पर्यटन और संस्कृति के लिए सरकार के सचिव के रूप में नियुक्त किया गया था. 19 जून 1977 को जन्मीं स्मिता तत्कालीन आंध्र प्रदेश कैडर की 2001 बैच की आईएएस अधिकारी हैं. शादी से पहले उनका नाम स्मिता दास था. उनका जन्म पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में एक बंगाली परिवार में हुआ था. उनके पिता कर्नल प्रणब दास इंडियन आर्मी में सेवारत थे और उनकी मां का नाम पूरबी दास हैं.
स्मिता सभरवाल ने अपनी स्कूली शिक्षा सिकंदराबाद के सेंट एन्स हाई स्कूल से पूरी की, जहां से उन्होंने ICSE एग्जाम में नेशनल लेवल पर टॉप किया. उन्होंने हैदराबाद के सेंट फ्रांसिस कॉलेज फॉर विमेन से कॉमर्स की डिग्री हासिल की. 22 साल की उम्र में उन्होंने साल 2000 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास की थी जिसमें उन्हें पूरे देश में चौथी रैंक मिली थी. 2001 में उन्होंने मसूरी के लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में ट्रेनिंग ली और उसके बाद प्रोबेशन के दौरान आदिलाबाद में डिस्ट्रिक्ट लेवल ट्रेनिंग की.
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उनकी पहली इंडिपेंडेंट पोस्टिंग चित्तूर के मदनपल्ले में सब कलेक्टर के रूप में हुई, जहां उन्होंने लैंड रिवेन्यू मैनेजमेंट और डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन में अनुभव हासिल किया. बाद में उन्होंने कडप्पा में डिस्ट्रिक्ट रूलर डेवलेपमेंट एजेंसी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर के रूप में रूलर डेवलेपमेंट फील्ड में काम किया. वारंगल की म्युनिसपल कमिश्नर के रूप में उन्होंने फंड योर सिटी पहल की शुरुआत की जिसमें पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए ट्रैफिक जंक्शन, बस स्टॉप, फुट ओवरब्रिज औप पार्क जैसे सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में मदद की. इसके बाद उन्होंने विशाखापत्तनम में कॉमर्शियल टैक्स के लिए डिप्टी कमिश्नर के रूप में काम किया.
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