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कश्मीर की दो सहेलियों ने JEE Mains 2025 में किया कमाल, पहले अटेम्प्ट में लाईं 99 पर्सेंटाइल से ज्यादा स्कोर

दो कश्मीरी सहेलियों ने अपने पहले प्रयास में ही JEE Main 2025 में सफलता हासिल की है. इतना ही नहीं ये दोनों 10वीं बोर्ड परीक्षाओं की भी टॉपर रही हैं, जानें किस स्ट्रैटजी से दोनों ने की थी तैयारी

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कश्मीर की दो सहेलियों ने JEE Mains 2025 में किया कमाल, पहले अटेम्प्ट में लाईं 99 पर्सेंटाइल से ज्यादा स्कोर

 Simrah Mir and Sadaf Mushtaq

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पुलवामा और कुलगाम में रहने वाली दो कश्मीरी सहेलियों ने अपने पहले प्रयास में ही JEE Main 2025 में सफलता हासिल की है. सिमराह मीर और सदफ मुश्ताक ने JEE Main सेशन 1 में क्रमशः 99.39 और 99.50 पर्सेंटाइल स्कोर किए. मौसम और इंटरनेट शटडाउन की चुनौतियों के बीच भी इन लड़कियों का दृढ़ संकल्प अडिग रहा. दोनों का अगला निशाना अब JEE एडवांस पर है.

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10वीं बोर्ड टॉपर रही हैं सदफ
पुलवामा की रहने वाली सदफ कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में राज्य की टॉपर रही है. उनका मानना है कि शिक्षा एक शक्तिशाली साधन है जिसके माध्यम से वे अधिक लड़कियों को हाई लेवल की परीक्षा पास करने के लिए प्रेरित कर सकती हैं. अपने माता-पिता और स्थानीय कोचिंग संस्थान RISE की मदद से उन्होंने अपने सपने को साकार किया है.

सदफ मुश्ताक ने कहा,  'सिलेबस और कड़ी प्रतिस्पर्धा की वजह से यह परीक्षा एक कठिन लड़ाई की तरह लगा. लेकिन मैंने आत्म-विश्वास और लगातार कड़ी मेहनत पर भरोसा किया. देर रात तक रिवीजन, मॉक टेस्ट और दृढ़ता ने मुझे आगे बढ़ने में मदद की. अब मैं एक इंजीनियर बनने की ख्वाहिश रखती हूं और अधिक कश्मीरी लड़कियों को बाधाओं को तोड़ने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करना चाहती हूं.'

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वंचितों के लिए करना चाहती हैं टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल
उनकी दोस्त सिमराह मीर के लिए जेईई की तैयारी को अपनी अपेक्षाओं के साथ संतुलित करना एक वास्तविक चुनौती थी. उन्होंने बताया, 'मैंने एक अनुशासित अध्ययन योजना बनाकर ध्यान केंद्रित किया और कभी भी संदेह को अपने दृढ़ संकल्प पर हावी नहीं होने दिया. मेरा सपना आईआईटी में पढ़ाई करना और वास्तविक दुनिया की समस्याओं को हल करने खासकर वंचित समुदायों के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना है.'

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मीर ने 11वीं क्लास से ही जेईई की तैयारी शुरू कर दी थी. आत्म-अनुशासन और स्मार्ट तैयारी ने उनकी तैयारी में काफी मदद की. 10वीं में 97 प्रतिशत नंबर लाने वालीं सिमराह ने कहा, 'मैंने सोशल मीडिया का इस्तेमाल कम कर दिया और सवालों को आंख मूंदकर सॉल्व करने के बजाय कॉन्सेप्ट को गहराई से समझने की कोशिश की. उम्मीदवारों को अपने कमजोर टॉपिक्स की पहचान करनी चाहिए और उन पर काम करना चाहिए. साथ ही पिछले सालों के प्रश्नपत्रों को हल करने से भी एग्जाम पैटर्न को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है.

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