एजुकेशन
Success Story: हर्ष गुप्ता की कहानी बहुत ही रोचक है. उन्हें IIT Roorkee में भी एडमिशन पहली बार में नहीं मिला बल्कि उन्होंने JEE Advanced Exam दूसरी बार देने पर बाजी मारी है. उनकी कहानी सबक देती है कि फेल होना महज जिंदगी का एक स्टेप है, इसे फाइनल रिजल्ट मानकर ठहरना नहीं चाहिए.
Success Story: कक्षा-11 में अमूमन कोई स्टूडेंट फेल नहीं होता है, लेकिन यदि आप फेल हो गए तो क्या करेंगे? आपका सपना IIT से इंजीनियरिंग करने का है, लेकिन पहली बार में सफल ना हुए तो क्या करेंगे? यदि आपके पास इन सवालों के जवाब निगेटिव में हैं तो आपको हर्ष गुप्ता की कहानी जाननी चाहिए. महाराष्ट्र के कल्याण में सड़क किनारे ठेले पर गोलगप्पा बेचने वाले संतोष गुप्ता के बेटे हर्ष की जिंदगी में ये दोनों घटनाएं घटी हैं. इसके बावजूद हर्ष इस सप्ताह IIT-Roorkee में अपने सपने को पूरा करने जा रहे हैं. हर्ष की कहानी जानकर आप समझ पाएंगे कि किसी भी काम में फेल होना फाइनल रिजल्ट नहीं बल्कि जिंदगी का महज एक स्टेप है. इस स्टेप पर ठहरकर फेल होने के बारे में सोचते हुए निराश होने के बजाय इससे आगे बढ़कर आप सफलता हासिल कर सकते हैं.
दो कमरों के घर में रहता है परिवार
19 साल के हर्ष का परिवार बेहद गरीब है. वह अपने दो छोटे भाइयों, माता-पिता और दादी के साथ कल्याण की एक चॉल में दो कमरों के घर में रहता है. हर्ष के पिता की कमाई महज घर चलाने के लिए ही पूरी हो पाती है. इसके चलते हर्ष की कोचिंग और टेस्ट आदि देने में होने वाला खर्च छोटे-छोटे कर्ज और एक-एक रुपया जोड़कर की गई सेविंग्स से पूरा हुआ है. हर्ष के माता-पिता ने उसके लिए जो सपने देखे हैं, IIT में एडमिशन उस तरफ पहला कदम है, लेकिन यह इतना आसान नहीं था.
कक्षा-11 में हो गया था फेल
हर्ष के लिए कक्षा-11 जिंदगी की सबसे बड़ी आपदा बनकर आया था. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, हर्ष एग्जाम से ठीक पहले अचानक एक गंभीर बीमारी के शिकार हो गए. इसके चलते उन्हें एग्जाम मिस करने पड़े और कई दिन तक अस्पताल के बेड पर रहन पड़ा. इस बीमारी का वे अब तक इलाज करा रहे हैं. एग्जाम नहीं देने के चलते हर्ष कक्षा-11 में फेल हो गए, लेकिन उन्होंने इससे हिम्मत नहीं हारी और आगे की तैयारी में जुट गए.
कक्षा-10 के बाद ही शुरू कर दी IIT की तैयारी
हर्ष को IIT के बारे में पहली बार कोरोना लॉकडाउन के समय पता चला. उसके एक टीचर ने इंजीनियरिंग कैंपसों के बारे में एक वीडियो दिखाया. इसके बाद हर्ष ने IIT में ही एडमिशन लेने को अपना टारगेट बना लिया. इसके लिए हर्ष ने कक्षा-10 पास होने के बाद से ही तैयारी शुरू कर दी थी. हर्ष के सपने को देखकर संतोष गुप्ता ने भी कोशिश शुरू की और दोस्तों से कर्ज लेकर उसे कोचिंग के लिए कोटा (Kota) भेजा. हर्ष कोचिंग के दौरान रोजाना 12 घंटे तक पढ़ता था. इससे उसने कक्षा-12 आसानी से पास कर दी. साथ ही JEE Main में भी उसके 98.9 परसेंटाइल मार्क्स आए, लेकिन JEE Advanced में पहले प्रयास में वह महज कुछ अंक से चूक गया. इसके बाद उसने एक साल का गैप लिया और फिर से तैयारी शुरू की. इस तैयारी का नतीजा JEE Advanced में 16,000 के करीब रैंक लाकर IIT Roorkee में जगह बनाने के तौर पर आया.
क्लासमेट उड़ाते थे गरीबी का मजाक, पढ़ाई से दिया उन्हें जवाब
हर्ष के रिश्तेदार और क्लासमेट उसकी गरीबी का मजाक उड़ाया करते थे. वे कहते थे कि स्ट्रीट फूड वेंडर का बेटा कभी IIT नहीं पहुंच सकता. हर्ष ने उनकी बातें सुनने के बजाय पढ़ाई में ध्यान लगाया और सिर्फ यह सोचा कि उसके सपने को पूरा करने के लिए उसके पिता आधी रात तक ठेला लगाकर बिजनेस करते हैं. अब उसकी सफलता ने उन सभी आलोचकों को हंसी का पात्र बना दिया है.
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