एजुकेशन
रूपल राणा ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2023 में 26वीं रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया है. उनकी यूपीएससी की यात्रा कई युवाओं को अपने सपनों की क्षमता पर विश्वास करने के लिए प्रेरित करती है. पढ़ें उनकी सफलता की कहानी...
कड़ी मेहनत और लगन के दम पर जिंदगी में क्या कुछ हासिल नहीं किया जा सकता. दृढ़ निश्चयी व्यक्ति का विपरीत परिस्थितियां भी कुछ बिगाड़ नहीं सकतीं. उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से ताल्लुक रखने वाली रूपल राणा की सफलता की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2023 में 26वीं रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया है. उनकी यह उपलब्धि विपरीत परिस्थितियों पर काबू पाने में दृढ़ संकल्प, दृढ़ता और सही मार्गदर्शन की शक्ति का प्रमाण है. रूपल राणा की यूपीएससी की यात्रा कई युवाओं को अपने सपनों की क्षमता पर विश्वास करने के लिए प्रेरित करती है.
यह भी पढ़ें- भारत की बेटी ने US यूनिवर्सिटी में सुलझाई 100 साल पुरानी मैथ्स की गुत्थी, हैरान रह गए टीचर्स
रूपल राणा ने अपनी शुरुआती पढ़ाई बागपत के जेपी पब्लिक स्कूल से शुरू की जहां उन्होंने अपनी हाई स्कूल परीक्षाओं में 10 का परफेक्ट सीजीपीए हासिल किया. जैसे-जैसे वह प्रतिष्ठित बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस पिलानी में 11वीं और 12वीं कक्षा में पहुंचीं, ज्ञान के प्रति उनकी प्यास और गहरी होती चली गई. बाद में उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के देशबंधु कॉलेज से साइंस में ग्रेजुएशन में टॉप किया.
यह भी पढ़ें- कौन हैं कैरान काजी जिन्होंने 14 साल की उम्र में एलन मस्क को बनाया था मुरीद? इस पद पर SpaceX में मिली थी जॉब
रूपल के जीवन में दुखों का पहाड़ तब टूट पड़ा जब उन्होंने कम उम्र में ही अपनी मां को खो दिया. लेकिन फिर उनके पिता जसवीर राणा उनकी ताकत बने, वह दिल्ली पुलिस में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात थे. पढ़ाई में उन्हें अपने भाई बहनों का भी पूरा सहयोग मिला और व्यक्तिगत दुख से ऊपर उठने के उनके दृढ़ संकल्प ने उनकी भविष्य की सफलता की नींव रखी.
यह भी पढ़ें- कौन हैं ये IAS जिन्हें IPS अन्ना सिन्हा ने बनाया अपना हमसफर? IIIT से बीटेक करने के बाद क्रैक की थी UPSC
रूपल राणा की सफलता की राह आसान नहीं थी. यूपीएससी परीक्षा में अपने पहले दो प्रयासों में उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा. हालांकि हार मानने के बजाय उन्होंने अपने अनुभवों से सीखा और अपनी तैयारी की रणनीति को और बेहतर बनाया. उनकी दृढ़ता का फल तब मिला जब उन्होंने अपने तीसरे प्रयास में परीक्षा पास की और आईएएस अधिकारी बनने का अपना सपना साकार किया.
यह भी पढ़ें- बाप ने कर्ज लेकर पढ़ाया और बेटियों ने बढ़ाया मान, तीन सगी बहनों ने एक साथ पास कर ली यूपी पुलिस की परीक्षा
रूपल राणा की उपलब्धि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे कई उम्मीदवारों के लिए उम्मीद की किरण है. उनकी कहानी हमें याद दिलाती है कि समर्पण, कड़ी मेहनत और दृढ़ता से सबसे कठिन चुनौतियों को भी पार किया जा सकता है. उनकी कहानी साबित करती हैं कि सफलता उन्हीं को मिलती है जो दृढ़ निश्चय के साथ उसका पीछा करते हैं.
अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें हमारे गूगल, फेसबुक, x, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से.