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यूपीएससी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए डॉ. सुमिता मिश्रा का अब तक का सफर किसी प्रेरणा से कम नहीं है. पढ़ें उनकी सक्सेस स्टोरी
डॉ. सुमिता मिश्रा भारतीय प्रशासनिक सेवा की एक प्रतिष्ठित सिविल सेवक हैं जिनके पास 33 सालों से अधिक का अनुभव है. सुमिता 1990 से हरियाणा सरकार में विभिन्न प्रतिष्ठित पदों पर प्रशासक रही हैं. उन्हें एसडीएम, डीसी के रूप में सार्वजनिक प्रशासन और सिंचाई, कृषि, परिवहन, पर्यटन, महिला एवं बाल कल्याण, नवीकरणीय ऊर्जा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों और मुख्यमंत्री कार्यालय में कार्य करने का अनुभव है. यूपीएससी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए उनका अब तक का सफर किसी प्रेरणा से कम नहीं है.
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30 जनवरी 1967 को लखनऊ में एनसी मिश्रा और पीके मिश्रा के घर जन्मी सुमिता मिश्रा ने अपनी शुरुआती शिक्षा लखनऊ के लोरेटो कॉन्वेंट स्कूल से हासिल की और ला मार्टिनियर से आईएससी की पढ़ाई पूरी की. स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने अर्थशास्त्र में आगे की पढ़ाई जारी रखी. वह लखनऊ विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में बीए और एमए दोनों में गोल्ड मेडलिस्ट रही हैं.
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उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में पीएचडी की है. इतना ही नहीं उन्होंने अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटीऔर लंदन के रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, आईआईएम अहमदाबाद , आईआईएम बैंगलोर और यूके की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से सार्वजनिक नीति में अल्पकालिक पाठ्यक्रम किए हैं. वह 1990 में भारतीय प्रशासनिक सेवाओं में चुनी गईं और महिलाओं की श्रेणी में टॉपर रहीं और अपने बैच में 10वें स्थान पर रहीं.
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अक्षय ऊर्जा निदेशक के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान हरियाणा को अक्षय ऊर्जा में उत्कृष्ट कार्य के लिए 2007 में भारत की राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल से 3 राष्ट्रीय पुरस्कार मिले. डॉ. सुमिता मिश्रा के नेतृत्व में हरियाणा लगातार तीन वर्षों तक ऊर्जा संरक्षण के लिए सभी राज्यों में राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता रहा जो एक रिकॉर्ड है. उन्होंने हरियाणा के लिए नई अक्षय ऊर्जा बिजली नीति 2005 का मसौदा तैयार किया जो स्वतंत्र बिजली उत्पादकों से लगभग 5000 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करने में सफल रही. फिलहाल वह हरियाणा की गृह सचिव हैं. IAS सुमिता मिश्रा की सोशल मीडिया पर तगड़ी फैन फॉलोइंग है और अक्सर वह यूपीएससी एस्पिरेंट्स को मोटिवेट करती नजर आती हैं.
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