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साइंटिस्ट बनते-बनते कैसे PM की प्राइवेट सेक्रेटरी बन गईं निधि तिवारी? जानें मेडिकल से डिप्लोमेसी तक का सफर

IFS निधि तिवारी अजित डोभाल की टीम से सीधे पीएम की प्राइवेट सेक्रेटरी बन चुकी हैं. जानें कैसे मेडिकल बैकग्राउंड से आने वाली निधि साइंटिस्ट बनते-बनते डिप्लोमैट बन गईं...

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साइंटिस्ट बनते-बनते कैसे PM की प्राइवेट सेक्रेटरी बन गईं निधि तिवारी? जानें मेडिकल से डिप्लोमेसी तक का सफर

IFS Nidhi Tewari 

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IFS निधि तिवारी अजित डोभाल की टीम से सीधे पीएम की प्राइवेट सेक्रेटरी बन चुकी हैं. 2014 बैच की भारतीय विदेश सेवा की अधिकारी निधि तिवारी को यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में 96वीं रैंक हासिल हुई थी. निधि शुरुआत से ही प्रतिभाशाली व्यक्तित्व की धनी रही हैं और पढ़ाई लिखाई में उन्होंने हमेशा टॉप किया. निधि मेडिकल बैकग्राउंड से आती हैं और साल 2004 में उन्होंने लखनऊ यूनिवर्सिटी से बायोकेमेस्ट्री में बीएससी किया था. इसके बाद उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से बायोकेमेस्ट्री में एमएससी की. यहां उन्हें एकेडमिक्स में बढ़िया प्रदर्शन के लिए गोल्ड मेडल भी मिला.

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मेडिकल की पढ़ाई के दौरान करीब आए निधि और सुशील

मेडिकल की पढ़ाई के दौरान ही उनकी मुलाकात उनके जीवनसाथी सुशील जायसवाल से हुई. लैब में प्रैटिकल के दौरान दोनों एक-दूसरे के करीब आए और प्यार से शुरू हुआ यह रिश्ता 2006 में शादी तक पहुंच गया. शादी के दो साल बाद दोनों का एक बेटा भी हुआ. शादी के बाद निधि ने साइंटिस्ट बनने के लिए कमर कस ली और साल 2007 में उनकी भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र  में सिलेक्शन हुआ और नौकरी के सिलसिले में उन्हें महाराष्ट्र जाना पड़ा. हालांकि यह नौकरी बहुत ज्यादा दिन तक उन्हें रास नहीं आई और उनके मन में ब्यूरोक्रेसी में जाने की इच्छा पैदा हुई.

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ब्यूरोक्रेसी में यूं जागी दिलचस्पी

बेटे के जन्म के दौरान जब निधि घर वापस आईं तभी से उन्होंने सिविल सेवाओं की तैयारी शुरू कर दी. सबसे पहले उन्होंने यूपीपीसीएस की परीक्षा दी और असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर उनका सिलेक्शन हुआ. जॉब के साथ-साथ वह यूपीएससी की तैयारी करती रहीं और साल 2011 में पहली बार यूपीएससी का एग्जाम दिया लेकिन इस बार वह असफल रहीं. निधि ने हार नहीं मानी और लगातार अपनी तैयारी में जुटी रहीं उन्होंने दोबारा साल 2013 में यूपीएससी का एग्जाम दिया और इस बार उनकी मेहनत रंग लाई. उन्हें यूपीएससी की परीक्षा में 96वीं रैंक मिली और उनका चयन भारतीय विदेश सेवा के लिए हुआ.

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साल 2017 में उन्हें विदेश मंत्रालय में डेस्क जॉब मिली और यहां काम करने के बाद वह पीएमओ पहुंची और अब अपनी काबिलियत के दम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राइवेट सेक्रेटरी बन गई हैं. उनकी सफलता की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है जो शादी के बाद पारिवारिक जिम्मेदारियां संभालते हुए कुछ करना चाहते हैं.

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