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गाजियाबाद के डीएम दीपक मीणा की कहानी बेहद प्रेरणादायक है जिन्होंने आईआईटी की पढ़ाई के बाद यूपीएससी की तैयारी की और बढ़िया नंबरों के साथ इसे पास किया. जानें उनकी सक्सेस स्टोरी...
यूपीएससी को देश की सबसे मुश्किल परीक्षाओं में से एक माना जाता है. पहले के समय में उम्मीदवार सामान्य बीएससी या बीए करके यूपीएससी की तैयारी में जुट जाते थे लेकिन आजकल स्थिति बदल गई है. आजकल आईआईटी और आईआईएम के स्टूडेंट्स भी यूपीएससी की परीक्षा में बैठ रहे हैं और बढ़िया रैंक के साथ इसे क्रैक कर रहे हैं. गाजियाबाद के डीएम दीपक मीणा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है जिन्होंने आईआईटी की पढ़ाई के बाद यूपीएससी की तैयारी की और बढ़िया नंबरों के साथ इसे पास किया.
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15 जुलाई 1986 को जन्मे दीपक मीना राजस्थान से ताल्लुक रखते हैं. उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया. बीटेक पूरा होने के बाद टाटा स्टील में उनकी जॉब लग गई. कारपोरेट सेक्टर में बढ़िया करियर होने के बावजूद उनके मन में कहीं न कहीं यूपीएससी पास कर समाज सेवा करने का सपना पल रहा था इसलिए उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी. साल 2010 में उनकी मेहनत रंग लाई और यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा उन्होंने 373वीं रैंक के साथ क्रैक की.
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LBSNAA में ट्रेनिंग पूरी करने के बाद दीपक मीणा को यूपी कैडर में नियुक्त किया गया. उनकी शुरुआती पोस्टिंग अलीगढ़ में हुई जहां उन्हें फील्ड में काम करने का एक्सपीरियंस मिला. इसके बाद उन्होंने आजमगढ़, सहारनपुर और अलीगढ़ में संयुक्त मजिस्ट्रेट के रूप में काम किया. 14 अगस्त 2014 को उन्हें बुलंदशहर का मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) नियुक्त किया गया और फिर उन्होंने अलीगढ़, आगरा, मैनपुरी और सहारनपुर में इसी तरह के पदों पर काम किया.
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25 अप्रैल 2017 को मीना को श्रावस्ती का जिला मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया, वहां वह 8 जून 2019 तक सेवारत रहे. उसके बाद उन्हें सिद्धार्थ नगर ट्रांसफर कर दिया गया. 14 अप्रैल 2022 को उन्हें मेरठ का जिलाधिकारी बनाया गया और फिलहाल वह गाजियाबाद के डीएम हैं. उनकी सफलता की कहानी यह दिखाती है कि आप प्राइवेट जॉब करते हुए यूपीएससी क्रैक कर सकते हैं और अपने सपनों को जी सकते हैं.
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